नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और शीर्ष नेतृत्व ने उनके इस फैसले को स्वीकार कर लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने श्री अन्नामलाई द्वारा सौंपे गए त्यागपत्र को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु सहित देश की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे के. अन्नामलाई को दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में भाजपा के सबसे प्रमुख और आक्रामक चेहरों में गिना जाता था, ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
इस इस्तीफे की पृष्ठभूमि पिछले कुछ दिनों से तैयार हो रही थी। गौरतलब है कि श्री अन्नामलाई इसी सप्ताह देश की राजधानी दिल्ली के दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष सहित पार्टी के कई शीर्ष नेताओं से लंबी मुलाकातें की थीं। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों के दौरान उन्होंने सौहार्दपूर्ण माहौल में पार्टी के आलाकमान को अपने फैसले से अवगत कराया था। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की सलाह भी दी थी, लेकिन अन्नामलाई अपने रुख पर कायम रहे और आखिरकार 2 जून को अपना लिखित इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद शुक्रवार को पार्टी की ओर से उनके अलग होने की औपचारिक घोषणा कर दी गई।
भाजपा से अलग होने के तुरंत बाद के. अन्नामलाई ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता और अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्तिगत नाराजगी के कारण अलग नहीं हुए हैं, बल्कि उनकी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं और वे तमिलनाडु में एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत करना चाहते हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे 'वी द लीडर्स' नाम से एक नए नागरिक और राजनैतिक आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं, जिसे भविष्य में एक क्षेत्रीय दल का रूप दिया जाएगा। उनका मुख्य लक्ष्य तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के द्विध्रुवीय तंत्र को चुनौती देना और राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरना है।
दूसरी तरफ, तमिलनाडु भाजपा के नेताओं का कहना है कि अन्नामलाई के जाने से राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे या चुनावी संभावनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। वर्ष 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्नामलाई ने जुलाई 2021 से अप्रैल 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में काम किया था और युवाओं के बीच अपनी एक खास पहचान बनाई थी। अब उनके इस स्वतंत्र राजनैतिक कदम और नए आंदोलन के ऐलान के बाद यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि वे जमीनी स्तर पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) जैसी स्थापित क्षेत्रीय ताकतों के सामने खुद को कितनी मजबूती से स्थापित कर पाते हैं।







