विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अब भी यूक्रेन की सहायता कर रहा है और उसके साथ खुफिया सूचनाएं साझा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराना है। इसी कोशिश के तहत अमेरिकी प्रशासन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहा है, ताकि संघर्ष खत्म करने का रास्ता निकाला जा सके। ट्रंप के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी युद्ध समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन दोनों नेताओं के बीच गहरी दुश्मनी और घृणा की भावना है। इस कारण शांति का रास्ता निकालना बेहद मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को भी यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर इस युद्ध को किस तरह समाप्त किया जा सकता है। अमेरिका की ओर से बातचीत और मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के कारण समाधान तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
रूस से डीजल खरीदने को लेकर हाल में बनी सहमति पर भी ट्रंप ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस फैसले का उनकी रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी, दोनों के सांसद विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वाले सांसदों का तर्क है कि रूस से डीजल खरीदने की अनुमति देना उस प्रतिबंध का उल्लंघन होगा, जो अमेरिका ने रूस के तेल निर्यात पर लगाया है। यह प्रतिबंध यूक्रेन पर रूसी हमले के विरोध में लगाया गया था। हालांकि, ट्रंप ने इस समझौते का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल अमेरिका को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा पहुंचाना है। उनके मुताबिक, रूस से डीजल का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने से इसकी कीमतों में कमी आ सकती है। इससे कई देशों और बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। ट्रंप का मानना है कि ऊर्जा की कीमतों को कम करने के लिए उठाया गया यह कदम व्यापक स्तर पर लाभकारी साबित हो सकता है, जबकि दोनों दलों के सांसद इसे रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के संदर्भ में गलत मान रहे हैं।
इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि रूसी मिसाइल हमलों से पहले उनके देश को पश्चिमी देशों की ओर से कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिलती है। हालांकि, ट्रंप द्वारा ऊर्जा संयंत्रों पर हमले नहीं करने से जुड़ी एक अघोषित व्यवस्था लागू किए जाने के बाद यूक्रेन ने रूस की किसी भी तेल रिफाइनरी पर हमला नहीं किया है। इस घटनाक्रम के बीच रूस की ओर से भी पिछले दो दिनों से यूक्रेन के किसी ऊर्जा संयंत्र पर हमला नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से बचने की स्थिति दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। हालांकि, युद्ध पूरी तरह समाप्त करने को लेकर अब तक कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी रहने के बावजूद ऊर्जा ढांचे पर हमलों में आई इस अस्थायी रोक से आगे की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर बनी इस स्थिति के पीछे अमेरिकी प्रशासन की ओर से यूक्रेन को दी गई चेतावनी भी अहम बताई जा रही है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूक्रेन को स्पष्ट कर दिया था कि यदि उसने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका उसे खुफिया सूचनाएं देना और हथियारों की आपूर्ति करना रोक सकता है। इस चेतावनी के बाद यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना नहीं बनाए जाने की बात सामने आई है। वहीं, ट्रंप ने अब स्पष्ट किया है कि अमेरिका अभी भी यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहा है और उसकी सहायता जारी है। इससे एक ओर अमेरिका की ओर से यूक्रेन को समर्थन दिए जाने की पुष्टि होती है, तो दूसरी ओर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिकी प्रशासन के दबाव का भी पता चलता है। अमेरिका युद्ध समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों को लेकर अपनी शर्तें भी सामने रख रहा है।
इसी बीच, रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखते हुए मीकोलेव बंदरगाह के पास दो मालवाहक जहाजों पर हमला करने की जानकारी दी है। रूसी पक्ष के अनुसार, इन दोनों जहाजों में सैन्य सामग्री और ऐसे उपकरण लाए गए थे, जिनका इस्तेमाल सैन्य तथा सामान्य, दोनों तरह के कार्यों में किया जा सकता है। ऐसे उपकरणों को दोहरे इस्तेमाल वाली सामग्री कहा जाता है। रूस ने इसके अलावा यूक्रेन के कई अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है, जहां सैन्य सामग्री का निर्माण किया जाता था। इन हमलों के जरिए सैन्य आपूर्ति और रक्षा उत्पादन से जुड़े ठिकानों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। एक ओर अमेरिका युद्ध समाप्त कराने और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस की ओर से यूक्रेन के बंदरगाह के पास मालवाहक जहाजों तथा सैन्य सामग्री तैयार करने वाले ठिकानों पर हमले किए जाने से संघर्ष की गंभीरता बनी हुई है।
इस घटनाक्रम के बीच यूरोपीय संघ ने भी रूस के खिलाफ अपना दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। संघ ने मिसाइलों और ड्रोन के निर्माण में सहयोग देने वाले रूस के 1,600 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस के सैन्य उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों में सहयोग देने वाले व्यक्तियों तथा कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। मिसाइल और ड्रोन निर्माण में योगदान देने वालों को प्रतिबंधों के दायरे में लाने का फैसला रूस की सैन्य क्षमताओं को समर्थन देने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में उठाया गया कदम है। इस तरह, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका जहां खुफिया सूचनाएं साझा करने और मध्यस्थता के जरिए अपनी भूमिका बनाए हुए है, वहीं रूस यूक्रेन के सैन्य ठिकानों और मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने रूसी सैन्य उत्पादन में सहयोग करने वाले लोगों और कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की घोषणा की है।







