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आत्मीय प्रेरणा ही सफलता का मूल मंत्र व दिव्य प्राण: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: आत्मीय प्रेरणा ही सफलता का दिव्य प्राण है,मूल मंत्र है।सफल व्यक्तियों के जीवन का क्षण-क्षण प्रेरणा के प्रभाव से प्रकाशित होता है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। प्रेरणा का यह पुण्य प्रवाह जब जीवन में उमड़ने लगता है तो जीवन की जड़ता,शुष्कता,कठोरता विलीन होने लगती है,घटने-मिटने लगती है।जीवन में आए ठहराव में फिर से हलचल होने लगती है और यह हलचल तीव्रगामी तरंगों में तरंगित होने लगती है।अंतर-संवेदना के स्रोत फुट पड़ते हैं और अनुभूति व सफलता की अदृश्य ऊर्जा प्रकट-प्रत्यक्ष होने लगती है।फिर जीवन संवेदना ,भावना एवं करुणा की चैतन्य चेतना की ओर अग्रसर होने लगता है।इसके मूल में प्रेरणा के प्राण ही हिलोरें लेते हैं।प्रेरणा प्रकाश-स्रोत है,जो प्रतिकूलता के घने कुहासे को चीरकर आशाओं की सतरंगी आभा बिखेरती है।अभाव की दर्द भरी दलदल में समृद्धि का भव्य भवन खड़ा करती है और अशक्ति के मलीन-धूमिल आकाश में सामर्थ्य का सूर्य उदय करती है।

असफलता के असहाय क्षणों में प्रेरणा ही जीने का सहारा देती है,आगे बढ़ने का हौंसला देती है।यही है,जो जीवन को जीवंत बना देती है तथा हर कठिनाइयों में आत्मविश्वास का बल भरती है।दुर्गम और असंभव-सा लगने वाला लक्ष्य सहजता-सरलता से मिल जाता है। इसी कारण पतन-पराभव से जर्जर मानसिकता प्रगति उन्नति की ऊर्जा से ऊर्जान्वित हो जाती है।फिर जीवन में बिखराव रुकता है,भटकाव थमता है व उमंगों के अगणित बुझे दीप जगमगा उठते हैं।