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आम बजट 2026: विकसित भारत के संकल्प के साथ वित्त मंत्रालय की तैयारियां अंतिम चरण में

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय | 

नई दिल्ली: भारत सरकार आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट की तैयारियों को लेकर पूरी तरह से सक्रिय है। उत्तर भारत की कड़ाके की ठंड के बीच, राजधानी के नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय में गहमागहमी का माहौल है, जहाँ अधिकारी और अर्थशास्त्री देश की आर्थिक दिशा निर्धारित करने वाले इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यह बजट मोदी सरकार के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

हितधारकों के साथ सघन चर्चा का दौर

वित्त मंत्री की अध्यक्षता में पिछले कई हफ्तों से विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ प्री-बजट बैठकों (Pre-Budget Consultations) का दौर चल रहा है। इन बैठकों में उद्योग जगत के दिग्गजों, कृषि विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों, श्रमिक संगठनों और शिक्षाविदों के साथ गहन मंथन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बार सरकार का मुख्य ध्यान मध्यम वर्ग को करों में राहत देने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। उद्योग संगठनों ने विशेष रूप से विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) योजनाओं के विस्तार और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने की मांग रखी है।

आम आदमी और मध्यम वर्ग की उम्मीदें

2026 के इस बजट से देश के करोड़ों करदाताओं को भारी उम्मीदें हैं। चर्चा है कि सरकार व्यक्तिगत आयकर (Income Tax) की नई व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए मानक कटौती (Standard Deduction) की सीमा बढ़ा सकती है। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई को देखते हुए आम उपभोग की वस्तुओं पर शुल्क कम करने और डिजिटल लेनदेन के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने पर भी विचार किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए पेंशन योजनाओं और स्वास्थ्य बीमा (आयुष्मान भारत) के आवंटन में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

बुनियादी ढांचा और तकनीकी निवेश

सरकार का एक बड़ा लक्ष्य बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का आधुनिकीकरण है। रेलवे, राजमार्ग और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में बड़े पूंजीगत व्यय (Capex) की घोषणा होने की उम्मीद है। साथ ही, 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और 'सेमीकंडक्टर' क्षेत्र में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए विशेष फंड आवंटित किया जा सकता है। रक्षा बजट में भी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी तकनीक पर जोर रहने वाला है।

चुनौतियां और राजकोषीय प्रबंधन

वित्त मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास दर को बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करना है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, सरकार को एक संतुलित मार्ग चुनना होगा। बजट दस्तावेजों की छपाई से पहले होने वाली पारंपरिक 'हलवा सेरेमनी' भी जल्द ही आयोजित होने वाली है, जो बजट की गोपनीयता और अंतिम चरण की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला यह बजट न केवल अगले एक साल का लेखा-जोखा होगा, बल्कि यह भारत की पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण रोडमैप भी साबित होगा।