लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: जीवन परिदृश्य में अगर हम चारों तरफ नजर दौड़ाएं तो आधुनिक जीवन के वरदानों के साथ जुड़ा एक अभिशाप है बिगड़ती जीवनशैली ; जिसके चलते तमाम तरह की शारीरिक-मानसिक विसंगतियाँ पैदा हो रही हैं एवं व्यक्ति नाना प्रकार के मनोकायिक रोगों से ग्रस्त हो रहा है। उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
जीवन शैली क्या है ? इसके प्रमुख आयाम क्या हैं ? इतना समझ आ जाए तो फिर एक संतुलित जीवनशैली के सर्वमान्य सूत्रों को अपनाते हुए इन विसंगतियों से बचा जा सकता है और एक स्वस्थ,सुखी एवं सफल जीवन की नींव रखी जा सकती है।जीवनशैली के मुख्यतः चार आयाम हैं - आहार, विहार,विचार एवं व्यवहार ।
आहार - हल्का एवं पौष्टिक ही उचित है।सही भूख लगने पर ही भोजन करना आधारभूत नियम है।
"जैसा अन्न - वैसा मन" की उक्ति के अनुसार भोजन से शरीर का नहीं,मन एवं आत्मा का भी पोषण होता है।
विहार - विहार का तात्पर्य है सुबह उठने से लेकर रात्रि शयन तक की जीवनचर्या। समय पर शयन और समय पर प्रातः जागरण,इसका पहला स्वर्णिम सूत्र है।इस तरह व्यवस्थित,अनुशासित दिनचर्या जहाँ एक ओर कर्त्तव्यपालन का संतोष देती है,तो वहीं दूसरी तरफ अपने कार्यक्षेत्र एवं सामाजिक जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
विचार - शालीन एवं सहकार - सहयोगयुक्त व्यवहार
वाणी,व्यवहार की मुख्य संवाहक है।वाणी ऐसी हो ,जिससे किसी की भावना आहत न हो,जिससे सबका कल्याण हो।व्यवहार में उदारता,सहिष्णुता का समावेश निश्चित रूप से व्यक्तित्व को भावप्रवण बनाता है और चारों ओर सहयोग-सहकार भरे सुख-शांतिपूर्ण वातावरण का सृजन करता है।
विचार - जो सबसे सूक्ष्म और महत्वपूर्ण पक्ष है।
विचारों की शक्ति सर्वविदित है।विचार ही क्रमशः कर्म बनते हैं,जो आदतों के रूप में चरित्र का निर्माण करते हैं और व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण करते हैं।सो विचारों की शक्ति का सही नियोजन महत्वपूर्ण है।विचारों का श्रेष्ठ,सकारात्मक और विवेकसंगत होना अभीष्ट है।इस तरह जीवनशैली के चार आयाम - आहार, विहार,विचार और व्यवहार का उचित संयोजन एवं पोषण साथ ही ध्यान जीवनशैली से जुड़े विकारों की रक्षा करता है।अतः हर मनुष्य को एक स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली को अपनाना चाहिए।







