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इंसानी समस्या स्वयं के मन में बैठा स्वाभाविक डर है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: मनुष्य का आत्म विवेक असंभव को संभव बनाता है।कई बार असंभव को संभव में बदला है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

जब लोग सारी मुश्किलों को पार करते हुए आगे बढ़े और अपने कार्य को अंजाम तक पहुंचाया और इन सारी कहानियों में एक बात समान है और वह यह है कि हमारे पास करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प मौजूद नहीं था।इंसानी मन की समस्या की यही परिभाषा है।वह हमारे मन में स्वाभाविक डर बैठा देती है। हम उसे आत्मविश्वास के सहारे से , अपने प्रति भरोसे के सहारे से,अपने जुनून से तोड़ते हैं। हमारे सपने हमारे लिए उन अस्थायी संघर्षों से ज्यादा अहम हैं,जिन्हें पीछे छोड़ कर हमको आगे बढ़ना है।हर चुनौती के अंत में एक व्यक्तिगत सफलता हमारा इंतजार कर रही होती है।

' किसी भी कीमत पर करो ' का मतलब है कि अगर चीजें काम नहीं कर रही हैं तो अपनी गति तेज करना चाहिए,वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए एवं परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाना चाहिए।अगर हम लक्ष्य तक पहुंचने के लिए शॉर्टकट अपनाने का प्रयास करते हैं तो दौड़ में अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगें।इतिहास साक्षी है कि जिन लोगों ने शॉर्टकट का सहारा लिया,वे थोड़े समय के लिए सफल तो हो गए,पर हम यह भी पाएंगे कि वैसे लोग फिसलकर उसी जगह पर आ गए, जहाँ से उन्होंने शुरूआत की थी।जब दबाव बढ़ता है और कोई बहाना स्वीकार्य नहीं होता है।जब दांव पर बहुत कुछ लगा हुआ होता है,जब हम किसी भी कीमत पर करने वाली स्थिति में आ जाते हैं और काम को पूरा करके दम लेते हैं।