विदेश डेस्क- ऋषि राज
तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने देश में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की समस्याएं और मांगें सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा और दंगों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि हिंसक गतिविधियां न केवल कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पूरे समाज को तबाही की ओर ले जाती हैं।
रविवार को सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “लोगों की अपनी चिंताएं और समस्याएं हैं। एक जिम्मेदार सरकार के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम उनके साथ बैठें, संवाद करें और समाधान निकालें। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि कुछ समूहों द्वारा फैलायी जा रही हिंसा को रोका जाए, क्योंकि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।”
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं और सरकार जनता की आवाज को अनदेखा नहीं कर सकती। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लेते हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है और आम लोगों की जान-माल को खतरा पैदा होता है, तब सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ते हैं।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने सुरक्षा बलों और प्रशासन से अपील की कि वे कानून के दायरे में रहकर स्थिति को संभालें और आम जनता के अधिकारों की रक्षा करें।
साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी संयम बरतने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उनके अनुसार, “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है, जिससे देश आगे बढ़ सकता है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह बयान सरकार की संतुलित नीति को दर्शाता है, जिसमें एक ओर जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया है। हाल के दिनों में ईरान के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
सरकार का कहना है कि वह इन मुद्दों पर सुधारात्मक कदम उठाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। राष्ट्रपति के इस बयान के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज होगी और तनावपूर्ण स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।







