विदेश डेस्क, ऋषि राज |
मनामा/कुवैत सिटी: बहरीन और कुवैत ने अपने क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए कथित ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। दोनों देशों ने कहा कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां न केवल उनकी संप्रभुता का उल्लंघन हैं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली हैं। ताजा घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक गहरा गया है तथा व्यापक संघर्ष की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं।
बहरीन और कुवैत की सरकारों की ओर से जारी अलग-अलग बयानों में कहा गया कि हालिया हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर गंभीर ध्यान देने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल सिद्धांत है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि खाड़ी देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और किसी एक देश पर हमला पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
वहीं बहरीन ने भी हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं किया जा सकता। बहरीन के अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और विवादों का समाधान बातचीत तथा कूटनीतिक माध्यमों से खोजा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच खाड़ी देशों की बढ़ती चिंता स्वाभाविक है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, जिसके कारण ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा हो गई हैं। विश्लेषकों के अनुसार यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र में होने वाले अगले राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।







