विदेश डेस्क,श्रेयांश पराशर।
तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका के हालिया सैन्य हमलों के जवाब में बहरीन, जॉर्डन और कुवैत स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को जवाब देना था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, बहरीन में स्थित ईसा एयर बेस के आसपास ड्रोन गतिविधियां देखी गईं। ईरान का दावा है कि ड्रोन ने ईंधन भंडारण टैंक, सैन्य उपकरणों के गोदाम, मिसाइल भंडारण स्थलों और सैनिकों के बैरकों को निशाना बनाया। वहीं, उत्तरी इराक में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे के निकट भी विस्फोटों की सूचना सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थलों की निगरानी कर रही हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
बहरीन के गृह मंत्रालय ने हवाई हमले के सायरन बजने की पुष्टि की है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। हालांकि, मंत्रालय ने ईरान के हमले संबंधी दावों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। अमेरिका की ओर से भी इस घटनाक्रम पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।
फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी है। स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।







