विदेश डेस्क, ऋषि राज।
तेहरान: ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान तब तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को नहीं खोलेगा, जब तक उसकी ओर से रखी गई प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।
गालिबाफ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटानी होगी। इसके साथ ही जब्त संपत्तियों को मुक्त करने और तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य धमकियां बंद होने तक जलमार्ग को खोलने का सवाल नहीं उठता।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा किसी संभावित समझौते की दिशा में चल रही कोशिशों के बीच दिया है। दोनों देशों के बीच जून में तनाव कम करने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक सहमति पत्र यानी एमओयू तैयार हुआ था। हालांकि, उसकी समय सीमा बिना किसी सफलता के समाप्त हो गई।
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के सामने रखी गई शर्तें ईरान के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंध और नाकेबंदी हटाने के साथ जब्त संपत्तियों को मुक्त करना जरूरी है। इसके अलावा तेल क्षेत्र से संबंधित प्रतिबंधों को हटाने तथा सैन्य धमकियों को समाप्त करने की भी मांग की गई है।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक पोत पर हमला होने से क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई। इसके बाद जलमार्ग की सुरक्षा और वहां से होने वाले समुद्री आवागमन को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ईरान की ओर से जलमार्ग को खोलने को लेकर रखी गई शर्तों ने इस रणनीतिक क्षेत्र को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका को पहले प्रतिबंधों और नाकेबंदी से जुड़े कदमों में बदलाव करना होगा। साथ ही सैन्य दबाव और धमकियों को समाप्त करना भी जरूरी होगा। दूसरी ओर, उपलब्ध खबर में अमेरिका की ओर से ईरान की इन ताजा शर्तों पर तत्काल प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं दी गई है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है। ईरान की शर्तों के बाद किसी नए समझौते या वार्ता की दिशा में क्या प्रगति होती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।







