विदेश डेस्क, ऋषि राज
मॉस्को: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी सामरिक पकड़ मजबूत करने के लिए तेज गति से चलने वाली छोटी युद्ध नौकाओं के बड़े नेटवर्क पर निर्भरता बढ़ा दी है। रक्षा विशेषज्ञ इस रणनीति को “मच्छर बेड़ा” (Mosquito Fleet) के नाम से जानते हैं, जो संख्या और गति के बल पर बड़ी नौसैनिक ताकतों को चुनौती देने की क्षमता रखता है।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान की इस रणनीति का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी प्रभावी मौजूदगी बनाए रखना और संभावित सैन्य टकराव की स्थिति में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के इस “मच्छर बेड़े” में सैकड़ों छोटी, तेज गति से चलने वाली नौकाएं शामिल हैं। इनमें से कई हल्के हथियारों, रॉकेट लॉन्चर और कम दूरी की मिसाइलों से लैस हैं। इन नौकाओं का संचालन मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी नौकाओं की बड़ी संख्या किसी भी शक्तिशाली नौसेना के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि वे तेजी से हमला कर क्षेत्र बदल सकती हैं।
ईरान के पास गदीर श्रेणी की मिनी पनडुब्बियां, ड्रोन, तटीय मिसाइल प्रणालियां और हजारों मिसाइलें भी हैं। इन सभी संसाधनों के साथ मिलकर यह रणनीति होर्मुज क्षेत्र में एक बहुस्तरीय सुरक्षा एवं आक्रामक तंत्र तैयार करती है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार इससे ईरान को कम लागत में अधिक प्रभावी प्रतिरोध क्षमता हासिल होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो इस रणनीति के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश लंबे समय से इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर वैश्विक शक्तियों का ध्यान पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति की ओर खींचा है। ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।






