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ईरान पर परमाणु हमले की आशंका, टकर कार्लसन ने दी विश्वयुद्ध की चेतावनी

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने एक बार फिर ईरान पर संभावित परमाणु हमले को लेकर चेतावनी दी है। उनका दावा है कि अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक तरह की 'न्यूक्लियर क्लॉक' चल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर परमाणु हमला करने का आदेश दे सकते हैं। कार्लसन के मुताबिक, अमेरिका इस तरह की सैन्य कार्रवाई के बेहद करीब हो सकता है। उन्होंने संभावित हमले का निशाना ईरान के नतान्ज परमाणु केंद्र के पास स्थित पिकएक्स माउंटेन के नीचे बने एक बेहद सुरक्षित भूमिगत परिसर को बताया है।

कार्लसन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अपने दावों के समर्थन में एक जानकार व्यक्ति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू इस मुद्दे पर ट्रंप को रोजाना फोन कर रहे हैं और उन पर लगातार दबाव बना रहे हैं। कार्लसन का दावा है कि पिछले सप्ताह आए चुनावी नतीजों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री राजनीतिक मुश्किलों में घिर गए हैं। उनके अनुसार, जब तक ट्रंप उनकी मदद नहीं करते, तब तक नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना संभव नहीं होगा।

कार्लसन ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के पास अब परमाणु हमले के अलावा कोई प्रभावी सैन्य विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने फरवरी से ही अमेरिकी परमाणु सिद्धांत में चुपचाप बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य युद्ध के मैदान में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल आसान बनाना है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।

कार्लसन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है तो पूरे क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल सकता है। उनके मुताबिक, इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रूस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देश भी इस टकराव में शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में परमाणु संघर्ष बड़े युद्ध का रूप ले सकता है और तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हो सकती है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि पहले परमाणु हमले के बाद तीसरा विश्वयुद्ध शुरू होना लगभग तय है। उनके अनुसार, यह युद्ध लंबा नहीं चलेगा, बल्कि छोटा और निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु हमले की स्थिति में रूस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया किस वजह से युद्ध में शामिल होंगे। इन देशों की संभावित भूमिका को लेकर भी उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।

कार्लसन पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु टकराव की आशंका जताते रहे हैं। उनकी ताजा चेतावनी भी इसी सिलसिले का हिस्सा है। हालांकि, उनके दावों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अमेरिकी नीति-निर्माण से जुड़े हलकों में उनकी नई पोस्ट को ठोस प्रमाणों से समर्थित नहीं माना जा रहा है। उनके दावों और उन्हें साबित करने के लिए पेश किए गए तथ्यों के बीच काफी अंतर बताया जा रहा है।

कार्लसन के दावों के विपरीत, व्हाइट हाउस और पेंटागन ने अमेरिकी परमाणु नीति में किसी नए बदलाव की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में न तो किसी अमेरिकी अधिकारी का नाम बताया और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश किया। अपने गंभीर आरोपों के लिए उन्होंने अज्ञात सूत्रों का हवाला दिया है। ऐसे में उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

दूसरी ओर, अक्टूबर में ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे, क्योंकि अमेरिका को इसकी जरूरत ही नहीं है। ट्रंप का यह बयान कार्लसन की ओर से जताई गई परमाणु हमले की आशंका से अलग रुख दिखाता है।

अमेरिका में पिछले कई महीनों से कुछ कट्टरपंथी समूह और नेता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर खतरे की आशंका जता रहे हैं। उनके दावों में कहा जाता रहा है कि ईरान कुछ ही सप्ताह या महीनों में परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

मार्च में कार्लसन ने अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के पूर्व निदेशक जो केंट का साक्षात्कार लिया था। इस बातचीत में ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना पर चर्चा हुई। जब केंट से पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब था, तो उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया।

केंट ने कहा कि जब यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ, उससे तीन सप्ताह पहले भी ईरान परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं था। उन्होंने जून की स्थिति का जिक्र करते हुए भी कहा कि उस समय ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी। उनके अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी, जिससे संकेत मिलता हो कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी नीति छोड़ने जा रहा है।

कार्लसन की ताजा चेतावनी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। हालांकि, परमाणु हमले की तैयारी, अमेरिकी परमाणु नीति में बदलाव और तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका से जुड़े उनके दावों की अब तक किसी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।