विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई और सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद संभावित हमले किए जा सकते हैं। इस सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने अतिरिक्त लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है।
संभावित हमले को लेकर अमेरिकी सैन्य तैयारियां लगातार तेज हो रही हैं। अमेरिकी नौसेना खाड़ी क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत, जिनमें यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट जैसे युद्धपोत शामिल हैं, और मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स तैनात कर रही है। इस बीच इजरायली सेना को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ किसी संभावित नए अभियान के लिए अपनी तैयारियां मजबूत कर रहे हैं।
अमेरिकी चुनावों को भी संभावित हमले की टाइमिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञ सुजैन मलोनी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव से पहले ईरान पर हमले से बच सकते हैं, क्योंकि युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और इसका असर चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, चुनाव समाप्त होने के बाद सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
मध्य पूर्व में तनाव का असर समुद्री मार्गों और व्यापारिक जहाजों पर भी दिखाई दे रहा है। वर्तमान स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे के वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और दुनिया के कई देशों की तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहकर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है।
अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की तैनाती और इजरायल की सेना को हाई अलर्ट पर रखने के बीच ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी प्रशासन की रणनीति में सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है। हालांकि, संभावित हमले की अंतिम तारीख और इसके वास्तविक स्वरूप को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध बेहद संवेदनशील दौर में है। एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, वहीं ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और अपने समुद्री हितों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यदि सैन्य कार्रवाई होती है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने के साथ तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।







