विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव में हार के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज करने की चेतावनी दी है। वहीं, प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तहत संसद में युद्ध खत्म करने के लिए मतदान कराने और सैन्य अभियान के उद्देश्यों, खर्च तथा आगे की रणनीति को लेकर ट्रंप प्रशासन से जवाब मांगने की योजना बनाई जा रही है।
ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अगर संभव हुआ तो वह ईरान के बाकी हिस्सों को तबाह नहीं करना चाहेंगे, लेकिन परिस्थितियों में ऐसा करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इसके बारे में जल्द ही पता चल जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आगे की सैन्य कार्रवाई कब होगी और उसके संभावित लक्ष्य क्या होंगे। साथ ही, उन्होंने नए हमलों का आदेश दिए जाने की भी कोई जानकारी नहीं दी।
ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है, जब डेमोक्रेट अगले संसदीय सत्र के लिए अपनी विदेश नीति से जुड़ी रणनीति तैयार कर रहे हैं। प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्ताव लाने का भरोसा दिया है। वहीं, डेमोक्रेटिक व्हिप कैथरीन क्लार्क ने सैन्य अभियान के वास्तविक उद्देश्यों और युद्ध से बाहर निकलने की स्पष्ट रणनीति को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उन्होंने ये टिप्पणियां ट्रंप की ताजा चेतावनी से पहले की थीं।
ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आगे सैन्य कार्रवाई जारी रखनी है या नहीं, इस पर फैसला किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित संभावित प्रस्तावों की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी मंजूरी के बिना ईरान कुछ भी नहीं कर रहा है।
ओवल ऑफिस की मेज पर रखी लाल वीटो टोपी
इस बीच, ट्रंप ने ओवल ऑफिस में डेमोक्रेट सदस्यों को राजनीतिक संदेश देने के लिए एक अलग अंदाज अपनाया। उन्होंने ऐतिहासिक रेजोल्यूट डेस्क पर 'वीटो' लिखा हुआ एक बड़ा लाल रंग का टोपी रखा। यह टोपी उस समय विशेष रूप से दिखाई दी, जब ट्रंप ओवल ऑफिस और कैबिनेट रूम को प्राचीन वस्तु अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्मारकों के रूप में संरक्षित करने से संबंधित उद्घोषणा पर हस्ताक्षर कर रहे थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने टोपी को अपनी मेज पर प्रमुखता से रखा।
उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति की बैठक रद
दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस की उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति की प्रस्तावित बैठक रद कर दी। इस समिति में एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसन हुआंग और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग सहित प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। बैठक रद होने का फैसला ऐसे समय आया, जब गुरुवार को प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
शेयर बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई चिंताएं बताई जा रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि मध्यावधि चुनाव के बाद संसद में डेमोक्रेट्स का प्रभाव बढ़ने से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास और विस्तार की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, एआई क्षेत्र में कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे पूंजीगत निवेश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बाजार में यह चिंता है कि इस तकनीक पर खर्च की जा रही भारी रकम के अनुपात में कंपनियों को पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएगा।
बैठक को लेकर जारी शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि यह सलाहकार समिति ट्रंप की नई एआई टास्क फोर्स को सुझाव और परामर्श देगी। इस विशेष इकाई को 'सुपर इंटेलिजेंस टास्क फोर्स' नाम दिया गया है। इसमें कैबिनेट के अधिकारियों, ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए सदस्यों और व्हाइट हाउस के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े मामलों में प्रशासन को सलाह देना है।







