विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस महीने ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान की तैयारी की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना 10 अक्टूबर के आसपास कई दिनों तक चलने वाले हमलों की तैयारी कर चुकी थी। प्रस्तावित अभियान में ईरान के परमाणु ठिकानों और शासन से जुड़े लक्ष्यों के साथ बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाने की योजना थी।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित हमले की तीव्रता 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों से भी ज्यादा हो सकती थी। इजरायली सेना ने 10 अक्टूबर वाले सप्ताहांत में कई दिनों तक बमबारी अभियान चलाने की योजना तैयार की थी। हालांकि, ट्रंप ने अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू करने को लेकर चिंता जताई। इसके बाद नेतन्याहू की हमले की योजना को फिलहाल रोक दिया गया। ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पहले भी ईरान के खिलाफ दोबारा कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं और ईरानी शासन को हटाने की बात कह चुके हैं।
ट्रंप ने इससे पहले अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा था कि वह 3 नवंबर तक ईरान पर हमले शुरू नहीं करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले किसी नए युद्ध में शामिल होने को लेकर ट्रंप की प्राथमिकताओं ने हमले को रोकने के फैसले में भूमिका निभाई। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित नए अभियान में अमेरिकी सेना सीधे तौर पर शामिल होने वाली थी या नहीं। एक व्यक्ति के अनुसार, आने वाले हफ्तों में अमेरिका और इजरायल के मिलकर ईरान पर हमला करने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। उसके मुताबिक, स्थिति या तो समझौते की ओर जाएगी या फिर हमले की तरफ बढ़ेगी।
अमेरिका की संभावित रणनीति को लेकर यह भी कहा गया है कि वह ईरान को अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर करना चाहता है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा विवाद भी शामिल हो सकता है। फरवरी से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही आंशिक रूप से बाधित होने की बात सामने आई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। ऐसे में इससे जुड़ा कोई भी तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाल सकता है।
इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सोमवार को इजरायल पहुंचे और उन्होंने नेतन्याहू समेत अन्य वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों के साथ बातचीत की। एक इजरायली अधिकारी के मुताबिक, इस दौरान इजरायली पक्ष ने संभावित हमलों के लिए लक्ष्यों की एक नई सूची भी पेश की। इसमें ऐसे ठिकाने शामिल थे, जिन्हें फरवरी में हुए हमलों के दौरान निशाना नहीं बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, नई सूची में नागरिक बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ स्थान भी शामिल थे। हालांकि, ट्रंप की ओर से चुनाव तक हमले रोकने की बात कहे जाने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने ईरान को फिर चेतावनी दी।
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने तेजी से अपना रुख नहीं बदला तो अमेरिका और इजरायल जल्द ही अपना काम पूरा कर सकते हैं। वहीं, नेतन्याहू ने सोमवार को जारी एक वीडियो में ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनसे एक काम पूरा करने की बात कही थी और दोनों मिलकर उसे पूरा करेंगे। इस बयान से संकेत मिलता है कि इजरायल ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। हालांकि, संभावित हमले की तारीख और उसमें अमेरिकी सेना की भूमिका को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।
बुधवार को एक चुनावी रैली में नेतन्याहू ने ईरान से पैदा होने वाले खतरे को खत्म करने के लिए वहां की सरकार को सत्ता से हटाने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने इजरायल को नष्ट करने की कोशिश की थी और परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा था, जिसे इजरायल ने रोक दिया। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है और इस खतरे को पूरी तरह खत्म करने का एकमात्र रास्ता ईरानी शासन को हटाना है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इजरायली सेना, खुफिया एजेंसी मोसाद और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन निर्देशों को कब और किस तरीके से लागू किया जाएगा।







