विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। ईरान के साथ जारी युद्ध में अमेरिका का सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। फरवरी में शुरू हुए इस युद्ध पर अमेरिका अब तक 47.1 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। 16 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने पिछले सप्ताह सांसदों को यह जानकारी दी। युद्ध पर बढ़ते खर्च से अमेरिकी सरकार के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। खर्च का यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल बड़े पैमाने पर नए सैन्य अभियान शुरू करने से बच रहे हैं।
पेंटागन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ईरान युद्ध में अब तक खर्च की गई कुल राशि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा बम, मिसाइलों और दूसरे हथियारों पर खर्च हुआ है। इससे स्पष्ट है कि युद्ध के दौरान सैन्य हमलों और हथियारों के इस्तेमाल पर अमेरिका को भारी रकम खर्च करनी पड़ रही है। हथियारों पर होने वाला यह खर्च युद्ध के कुल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, सैन्य विमानों के संचालन, युद्धपोतों की तैनाती और क्षेत्र में सैनिकों को बनाए रखने पर भी बड़ी राशि खर्च की गई है।
इससे पहले पेंटागन ने पिछले महीने अमेरिकी सांसदों के साथ युद्ध के खर्च का अनुमान साझा किया था। हालांकि, लगभग छह सप्ताह बाद जारी किए गए नए आंकड़ों में करीब 3.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च सामने आया है। इससे पता चलता है कि युद्ध पर होने वाला अमेरिकी खर्च लगातार बढ़ रहा है। रक्षा विभाग की ओर से साझा किए गए ताजा विवरण में सैन्य सेवाओं और युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हथियारों पर हुए खर्च समेत विभिन्न मदों का अवर्गीकृत ब्योरा शामिल है। इन आंकड़ों के माध्यम से युद्ध के आर्थिक बोझ और सैन्य संसाधनों पर पड़ रहे प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।
अमेरिकी वायुसेना ने युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों और बमवर्षक विमानों के संचालन पर 7.6 अरब डॉलर खर्च किए हैं। सैन्य अभियानों में इन विमानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। विमानों को लगातार अभियान के लिए तैयार रखने, उनके संचालन और युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल से संबंधित खर्च ने कुल सैन्य बजट पर दबाव बढ़ाया है। पेंटागन के आंकड़ों में वायुसेना के इस खर्च को युद्ध से जुड़ी प्रमुख मदों में शामिल किया गया है।
वहीं, अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत समेत दो दर्जन से अधिक युद्धपोतों की तैनाती पर 1.5 अरब डॉलर खर्च किए हैं। युद्ध क्षेत्र में समुद्री सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए इन युद्धपोतों को तैनात किया गया है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपने सैनिकों और सैन्य बलों को बनाए रखने पर 2.1 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इस तरह वायुसेना, नौसेना और थलसेना से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों पर अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। इन खर्चों में हथियारों के इस्तेमाल के अलावा सैन्य अभियानों और सैनिकों की तैनाती से संबंधित आवश्यकताएं भी शामिल हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान युद्ध से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती के कारण सैन्य संसाधनों, हथियारों और अभियानों पर होने वाला खर्च भी काफी अधिक है। युद्ध में अब तक 47.1 अरब डॉलर खर्च होने और पिछले अनुमान के मुकाबले करीब 3.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि जुड़ने से अमेरिकी सरकार के सामने आर्थिक दबाव की चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में युद्ध की अवधि, सैन्य तैनाती और हथियारों पर होने वाला खर्च आने वाले समय में अमेरिका के कुल वित्तीय बोझ को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।







