विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य टकराव की आशंका बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में तैनात अमेरिकी अधिकारियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने चेतावनी दी है कि ईरान की ओर से अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशों में तेजी आई है। कुछ कथित साजिशें भी ऐसे चरण में पहुंच गई हैं, जिन्हें गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इसी के मद्देनजर अमेरिका ने मध्य पूर्व में स्थित अपने कई राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या कम करने का फैसला किया है।
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने शुक्रवार को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भेजे एक संदेश में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने के प्रयासों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जानकारी दी। यह संदेश केंद्रीय खुफिया एजेंसी के निदेशक जान रैटक्लिफ को भी भेजा गया था। हालांकि, इसमें कथित साजिशों के संभावित निशानों या उनसे जुड़ी विस्तृत जानकारी का खुलासा नहीं किया गया। खुफिया प्रमुख की इस चेतावनी ने क्षेत्र में अमेरिकी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के बीच अमेरिका ने इसी सप्ताह सऊदी अरब में अपने राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों की संख्या घटाने के कदम उठाए। राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ जेद्दा और धाहरान में मौजूद वाणिज्य दूतावासों से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को वापस लौटने का आदेश दिया गया। इस फैसले का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, कतर, जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में भी अमेरिकी राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या कम किए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सभी देशों में कर्मचारियों की वापसी के औपचारिक आदेश की पुष्टि नहीं की। मंत्रालय के प्रवक्ता टामी पिगाट ने स्पष्ट किया कि गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को वापस बुलाने का आधिकारिक आदेश केवल सऊदी अरब के लिए जारी किया गया था। अन्य देशों में कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने से संबंधित खबरों और औपचारिक आदेश के बीच अंतर भी इस बयान से स्पष्ट हुआ।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारियों की संख्या घटाने के पीछे क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम, हूती समूह के हमलों की आशंका और ईरान से जुड़ी कथित साजिशों की चिंताएं शामिल हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और वहां तैनात कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। खुफिया प्रमुख की चेतावनी और विभिन्न राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या कम करने के फैसले ऐसे समय सामने आए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्प को फिर से सामने रखा है। शुक्रवार को फ्लोरिडा में उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और सीमित सैन्य अभियान चला सकता है या फिर ईरान समझौते के लिए सहमत हो सकता है। ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। क्षेत्र में अमेरिकी अधिकारियों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच उनके बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले अमेरिकी मीडिया में आई खबरों में भी बताया गया था कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व के कुछ ठिकानों पर तैनात अपने सैनिकों की संख्या घटा रही है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को वापस बुलाने और सैन्य ठिकानों पर सैनिकों की संख्या कम किए जाने से जुड़ी खबरें ऐसे समय आई हैं, जब ईरान के साथ संभावित टकराव को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं। हालांकि, खुफिया संदेश में कथित साजिशों के निशानों और उनके विस्तृत विवरण का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों की चेतावनी और सुरक्षा संबंधी कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं।






