नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
उच्चतम न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों ने संभाला पदभार
नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय में नियुक्त किए गए पांच नए न्यायाधीशों ने मंगलवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण कर ली। इन नियुक्तियों के साथ ही देश की शीर्ष अदालत में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि किए जाने के बाद यह नियुक्तियां न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उच्चतम न्यायालय के ऑडिटोरियम में आयोजित एक गरिमामय समारोह में नव नियुक्त न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्रीचंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना शामिल हैं। समारोह में न्यायपालिका से जुड़े अनेक वरिष्ठ न्यायाधीश, अधिवक्ता और गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
इन नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त करने वाली सिफारिशें पिछले महीने शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई थीं। सिफारिशों पर विचार के बाद केंद्र ने सोमवार को नियुक्तियों की औपचारिक अधिसूचना जारी की, जिसके उपरांत सभी चयनित व्यक्तियों ने मंगलवार को शपथ लेकर अपना कार्यभार संभाल लिया। न्यायपालिका में रिक्त पदों को भरने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जा रही है।
शपथ लेने वाले न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे थे। वहीं न्यायमूर्ति श्रीचंद्रशेखर बम्बई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। दोनों न्यायाधीशों को न्यायिक क्षेत्र में लंबे अनुभव और उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है।
इसी प्रकार न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे, जबकि न्यायमूर्ति अरुण पल्ली जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उच्च न्यायालयों में उनके व्यापक अनुभव को देखते हुए उन्हें शीर्ष अदालत में नियुक्त किया गया है, जिससे सर्वोच्च न्यायिक संस्थान को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा।
नव नियुक्त न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना का नाम भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने लंबे समय तक उच्चतम न्यायालय में वकालत की है और वे उन चुनिंदा विधि विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्हें बार से सीधे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को न्यायिक क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और लंबे अनुभव की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में जारी एक अध्यादेश के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी। पांच नए न्यायाधीशों के पदभार ग्रहण करने के बाद अब शीर्ष अदालत में केवल एक पद रिक्त रह गया है। माना जा रहा है कि शेष रिक्ति भी जल्द भरे जाने से न्यायालय में लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को और गति मिलेगी तथा न्यायिक कार्यप्रणाली की क्षमता में वृद्धि होगी।







