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एलपीजी संकट ने लोकसभा को ठप किया, विपक्ष का जोरदार हंगामा

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध की आग ने भारत के रसोई घरों को झुलसाना शुरू कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के तीखे हमलों के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित हो गई, जब एलपीजी की भारी किल्लत पर तत्काल चर्चा की मांग ने सदन को हंगामे की चपेट में ला खड़ा किया।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में नोटिस देकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की, जबकि स्पीकर ओम बिरला ने मंत्री के बयान का वादा किया। लेकिन विपक्ष अड़ा रहा, नारों और नुक्कड़ नाटक जैसे हथकंडों से सदन को अवरुद्ध कर दिया। यह संकट न सिर्फ लाखों परिवारों की दैनिक जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, बल्कि चुनावी मैदान में भी सरकार के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

 पश्चिम एशिया की जंग ने क्यों उगला भारत का ऊर्जा संकट?

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमलों से शिपिंग चेन टूट गई, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा पड़ा। कमर्शियल एलपीजी की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग में महीनों की देरी हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की विदेश नीति की कमजोरी ने देश को इस दलदल में धकेल दिया। राहुल गांधी ने सदन से बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा, "नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब!"

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर के रेस्तरां और छोटे कारोबार बंद होने की कगार पर हैं। मुंबई से कोलकाता तक लाइनें लगी हैं, और ग्रामीण इलाकों में महिलाएं घंटों इंतजार कर रही हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह संकट मुद्रास्फीति को और भड़का सकता है, जिससे जीडीपी ग्रोथ पर 1-2 फीसदी का नुकसान हो सकता है। विपक्ष इसे 'जनहित का चुनावी मुद्दा' बता रहा है, जबकि सरकार वैकल्पिक आयात स्रोतों पर जोर दे रही है।

 सदन में क्या-क्या चला: विपक्ष की आक्रामक रणनीति

सुबह दस बजे शुरू हुई कार्यवाही में विपक्ष ने जैसे ही एलपीजी मुद्दा उठाया, सदन में तूफान आ गया। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने स्पीकर से अपील की, "यह राष्ट्रीय संकट है, बाकी एजेंडा रोककर तुरंत बहस हो। लाखों घरों का चूल्हा ठंडा पड़ रहा है!" अन्य विपक्षी दलों- टीएमसी, डीएमके- ने समर्थन दिया, नारे लगाए 'मोदी सरकार हाय-हाय'।

स्पीकर ओम बिरला ने शांत रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "नोटिस मिल चुका है, पेट्रोलियम मंत्री को सूचित कर दिया गया। जब वे सदन में होंगे, तब विस्तृत चर्चा होगी।" लेकिन विपक्ष ने इसे टालमटोल बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में उभरते हुए सफाई दी, "सरकार चर्चा से भाग नहीं रही। हम समय तय कर जवाब देंगे, जनता को आश्वस्त करेंगे।" फिर भी, शोर-शराबा थमा नहीं। सांसदों ने सदन की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट के साथ धरना दे दिया, वीडियो वायरल हो गया।

अंत में, स्पीकर ने हताशा में सदन को दोपहर दो बजे तक स्थगित घोषित कर दिया। यह बजट सत्र का तीसरा दिन था जब विपक्ष ने ऊर्जा संकट को केंद्र में रखा। टीएमसी की महुआ मोइत्रा ने बर्तन बजाकर विरोध जताया, जो सोशल मीडिया पर सनसनी बन गया।

अविश्वास का साया: स्पीकर पर विपक्ष का निशाना

कार्यवाही स्थगित होने से ठीक पहले स्पीकर बिरला ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी। विपक्ष का दावा है कि सदन की अनदेखी से लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। बिरला ने कहा, "मैं सदन का संरक्षक हूं, किसी सियासी खेल का शिकार नहीं। प्रस्ताव पर विचार होगा।" यह मुद्दा एलपीजी संकट से जुड़ गया, विपक्ष ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' का प्रतीक बताया।

 वैश्विक जंग का घरेलू असर: अर्थव्यवस्था पर दबाव

पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत की 80 फीसदी तेल जरूरतों को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के हमलों से कच्चे तेल की कीमतें 20 फीसदी उछल चुकी हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ रहा। पीएम मोदी ने कल ही आपूर्ति समीक्षा की, लेकिन विपक्ष पूछ रहा है- "चेतावनी क्यों नजरअंदाज की?" रूस और अमेरिका से वैकल्पिक डील्स पर बात चल रही है, मगर विशेषज्ञ चेताते हैं कि लंबे युद्ध से राशनिंग अपरिहार्य हो सकती है।

देश के बड़े शहरों में होटल इंडस्ट्री चरमरा रही है। इंडियन रेस्तरेंट एसोसिएशन के मुताबिक, 50 हजार से ज्यादा प्रतिष्ठान प्रभावित। ग्रामीण भारत में यह संकट और गहरा है, जहां चूल्हा ही एकमात्र स्रोत है। विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "पीएम सदन में आकर जवाब दें, जनता का दर्द नजरअंदाज न करें।"

शाम चार बजे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सदन में बयान देंगे, जहां राहुल गांधी चर्चा की अगुवाई करेंगे। विपक्ष की रणनीति साफ है- सरकार को घेरना और जनता का गुस्सा संसद तक लाना। यह संकट न सिर्फ रसोई तक सीमित है, बल्कि पूरे राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है।