विदेश डेस्क, मुस्कान सिंह।
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी मदद देने की बात चीन ने पहली बार मानी
- सैन्य संघर्ष के दौरान पाक वायुसेना को दी गई थी ऑन-साइट सहायता, चीनी इंजीनियर का बड़ा खुलासा
बीजिंग। चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव में उसने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी को दिए गए इंटरव्यू में झांग हेंग ने बताया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के दौरान उन्हें पाकिस्तान वायुसेना को “ऑन-साइट तकनीकी सहायता” देने के लिए तैनात किया गया था। झांग हेंग चीन की सरकारी रक्षा कंपनी एवीआईसी यानी एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना से जुड़े हैं। यह वही कंपनी है जो चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों, ड्रोन और कई सैन्य तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की एयर डिफेंस और सैन्य तकनीकी सिस्टम को सक्रिय रखने के लिए चीनी विशेषज्ञ लगातार काम कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर थीं। इसी बीच चीन की ओर से पाकिस्तान को तकनीकी सहयोग दिए जाने की बात अब पहली बार आधिकारिक तौर पर सामने आई है।
हालांकि, चीन की सरकार ने इस बयान के बाद कोई अलग विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में बड़ा संकेत मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सैन्य सहयोग रहा है, लेकिन इस तरह किसी सैन्य संघर्ष के दौरान सीधे तकनीकी सहयोग की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति काफी अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत-चीन-पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और रक्षा साझेदारी को लेकर एशिया में पहले से तनाव बना हुआ है।
फिलहाल, इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना जताई जा रही है।







