Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

ओडिशा के 'डायमंड ट्रायंगल' का वैश्विक उदय

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

भुवनेश्वर/नई दिल्ली: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने ओडिशा के जाजपुर और कटक जिलों में स्थित तीन सुप्रसिद्ध बौद्ध स्थलों—रत्नागिरि, ललितगिरि और उदयगिरि—को आधिकारिक तौर पर अपनी विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची (Tentative List) में स्थान दे दिया है। सामूहिक रूप से 'डायमंड ट्रायंगल' के रूप में विख्यात ये स्थल न केवल प्राचीन वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं, बल्कि ये ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्दी तक बौद्ध शिक्षा, दर्शन और कला के अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहे थे। यह उपलब्धि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने इन स्थलों के ऐतिहासिक महत्व को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।

इन तीनों स्थलों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक गहरा है। ललितगिरि, जो इस त्रिकोण का सबसे प्राचीन हिस्सा है, अपनी विशाल ईंटों से बने स्तूपों और विहारों के लिए जाना जाता है। यहाँ की खुदाई के दौरान एक पत्थर के ताबूत के भीतर सोने और चांदी के संदूक में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष प्राप्त हुए थे, जो इसकी महानता को सिद्ध करते हैं। वहीं, रत्नागिरि अपनी उत्कृष्ट नक्काशीदार 'नीली हरित' पत्थर की द्वार-चौखटों और वज्रयान बौद्ध धर्म के केंद्रों के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित महाविहार के अवशेष आज भी उस युग की शैक्षणिक संपन्नता की कहानी बयां करते हैं। उदयगिरि, जो इस श्रृंखला का तीसरा और सबसे विस्तृत स्थल है, अपने विशाल जल कुंडों, पत्थर की सीढ़ियों और 'अवलोकितेश्वर' की भव्य मूर्तियों के लिए शोधकर्ताओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा है।

तथ्यों की सटीकता और प्रक्रिया: यूनेस्को की 'विश्व धरोहर सूची' (World Heritage List) में अंतिम रूप से शामिल होने से पहले किसी भी स्थल का 'संभावित सूची' (Tentative List) में होना अनिवार्य शर्त है। भारत ने इन स्थलों का नामांकन 'सीरियल प्रॉपर्टी' के रूप में किया था, जिसका अर्थ है कि इन तीनों को एक ही ऐतिहासिक संदर्भ के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इन स्थलों के शामिल होने के बाद यूनेस्को की संभावित सूची में भारत की कुल संपत्तियों की संख्या बढ़कर अब 70 हो गई है। यह कदम न केवल इन स्थलों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय धन और विशेषज्ञता के द्वार खोलता है, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर ओडिशा को एक प्रमुख 'बुद्धिस्ट सर्किट' के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय ने इस प्रक्रिया को गति दी। जानकारों का मानना है कि इन स्थलों का वैश्विक मान्यता की दिशा में आगे बढ़ना दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, जैसे थाईलैंड, जापान और वियतनाम के साथ भारत के सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा, क्योंकि इन देशों के श्रद्धालु और शोधकर्ता बड़ी संख्या में इन स्थलों की यात्रा करते हैं। राज्य की पर्यटन और संस्कृति मंत्री ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल एक सूची में शामिल होना नहीं है, बल्कि यह ओडिशा के उस गौरवशाली इतिहास का सम्मान है जिसने सदियों पहले शांति और अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया में फैलाया था। अब विशेषज्ञों की एक टीम विस्तृत 'डोजियर' तैयार करेगी ताकि भविष्य में इन्हें पूर्ण 'विश्व धरोहर स्थल' का दर्जा प्राप्त हो सके।