लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: "कल्पना सुंदर होती है, पर उसे जिया नहीं जा सकता और वास्तविकता कड़वी होती है, पर उसे छोड़ा भी नहीं जा सकता।" यह प्रेरणादायी विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई ) के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह समाजसेवी बिमल सर्राफ ने प्रेस को जारी अपने संदेश में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि शब्द भी एक प्रकार का भोजन हैं। यदि कोई शब्द या व्यवहार हमें स्वयं अच्छा नहीं लगता, तो उसे दूसरों के सामने भी प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। मधुर वाणी और सकारात्मक व्यवहार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान होते हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन की शुरुआत इस प्रश्न से करनी चाहिए कि वास्तव में हमारे जीवन में हमारा अपना क्या है। जब इस प्रश्न का उत्तर मिल जाता है, तब यह अनुभव होता है कि अंततः केवल ईश्वर ही शाश्वत हैं, शेष सब कुछ नश्वर और परिवर्तनशील है।
बिमल सर्राफ ने कहा कि केवल सांसों का रुक जाना ही मृत्यु नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति भी जीवित होकर मृत समान है, जिसने सत्य का साथ देने और गलत को गलत कहने का नैतिक साहस खो दिया हो। जीवन में कठिनाइयों का आना "पार्ट ऑफ लाइफ" है, लेकिन उन कठिनाइयों का मुस्कुराकर सामना करना और उनसे विजयी होकर निकलना ही "आर्ट ऑफ लाइफ" है।
उन्होंने कहा कि यदि हमारे स्वभाव में अहंकार है, तो हमें पराजित करने के लिए किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं, हम स्वयं ही अपने सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं। धन, सौंदर्य और पद समय के साथ बदल जाते हैं, इसलिए विनम्रता और सरलता ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी अंधे व्यक्ति को दृष्टि मिल जाती है, तो वह सबसे पहले उसी छड़ी को छोड़ देता है, जिसने जीवनभर उसका साथ दिया। इसलिए जीवन में उन लोगों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए, जिन्होंने कठिन समय में हमारा साथ निभाया हो।
उन्होंने कहा कि जब ज्ञान भावनाओं को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें हथियार बनाने लगे, तब उस ज्ञान पर भी विराम लगाकर आत्ममंथन करना आवश्यक हो जाता है। किसी से ऐसे प्रश्न नहीं पूछने चाहिए, जिनका उत्तर अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप मिलने की संभावना ही न हो, क्योंकि इससे अंततः दुख स्वयं को ही होता है। लोगों को उनके शब्दों से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार से पहचानना चाहिए, क्योंकि शब्द भ्रमित कर सकते हैं, जबकि व्यवहार सच्चाई को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ हम प्रवेश करते हैं, बल्कि भविष्य वह है, जिसका निर्माण हम अपने वर्तमान कर्मों से करते हैं। जिस प्रकार चाबी से खोला गया ताला बार-बार उपयोग में आता है, जबकि हथौड़े से तोड़ा गया ताला दोबारा उपयोगी नहीं रहता, उसी प्रकार रिश्तों को क्रोध के हथौड़े से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संवाद की चाबी से संभालना चाहिए।
अंत में बिमल सर्राफ ने कहा कि जीवन एक मधुर संगीत की भाँति है, जिसमें हमारे कर्म ही राग बनकर गूंजते हैं। अच्छे कर्म न केवल जीवन को आनंदमय बनाते हैं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ हमें सच्चे अर्थों में जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं।







