Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

किसान निबंधन शिविर का सीओ और बीएओ ने किया निरीक्षण

लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।

दरौंदा: स्थानीय प्रखंड क्षेत्र की सभी पंचायतों में किसान निबंधन शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर में उन किसानों का निबंधन किया जा रहा है, जिनके नाम से उनकी भूमि की जमाबंदी कायम हो चुकी है। इसी क्रम में निबंधन की प्रक्रिया को सही ढंग से सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड कृषि पदाधिकारी राम वीर सिंह यादव एवं अंचलाधिकारी वेद प्रकाश नारायण ने कई शिविरों का निरीक्षण किया। इस दौरान शिविर में कार्यरत कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

अधिकारियों ने बताया कि यह शिविर 9 जनवरी तक चलेगा। उन्होंने बताया कि निबंधन के बाद किसानों को एक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी डिजिटल पहचान बनेगी। किसान आईडी बनने के बाद सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी कृषि योजनाओं, खासकर किसान सम्मान निधि का लाभ उन्हें आसानी से मिल सकेगा।

अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे अपने नाम की जमीन से संबंधित दस्तावेज, रसीद, जमाबंदी नंबर, आधार कार्ड एवं मोबाइल नंबर के साथ अपने नजदीकी शिविर में जाकर निबंधन अवश्य कराएं। शिविरों में बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं।

हालांकि, कुछ किसान ऐसे भी नाराज दिखे जिनके पास पर्याप्त भूमि है और वे खेती करते हैं, लेकिन उनकी जमीन अभी पूर्वजों के नाम से दर्ज है। उनका कहना है कि वे ही उस जमीन के वास्तविक मालिक हैं, लेकिन सरकार उनके नाम की जमीन खोज रही है। ऐसे किसानों का कहना है कि जिनके पास जमीन है और वे खेती करते हैं, उनकी भी डिजिटल आईडी बननी चाहिए।