स्टेट डेस्क, मुस्कान सिंह।
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि नियामक शक्तियों का इस्तेमाल करते समय कानूनी प्रक्रिया और उचित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ कर रही थी।
मामला कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने FDA की ओर से कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने तथा करीब 2.45 करोड़ रुपये के स्टॉक को जब्त किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी थी। कंपनी का कहना था कि उसके खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने FDA की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई करते समय उचित प्रक्रिया का पालन और संबंधित पक्ष को सुनने का अवसर दिया जाना जरूरी है।
मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र FDA की ओर से अदालत को बताया गया कि वह कैडिला के खिलाफ जारी संबंधित आदेशों को वापस लेगा। इसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उसका पक्ष सुना जाएगा। कंपनी के जवाब पर विचार करने के बाद मामले में कानून के मुताबिक नया आदेश पारित किया जाएगा।
FDA की कार्रवाई के तहत कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में दवाओं का स्टॉक भी जब्त किया गया था। कैडिला ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था और नियामक प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि दवाओं और फार्मास्यूटिकल उत्पादों की निगरानी करना नियामक संस्था की जिम्मेदारी है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। कोर्ट की टिप्पणियों के बाद FDA ने पुराने आदेश वापस लेकर नए सिरे से कार्रवाई करने की बात कही है।
अब मामले में आगे की कार्रवाई कारण बताओ नोटिस और कंपनी के जवाब के आधार पर होगी। FDA कंपनी का पक्ष सुनने के बाद कानून के तहत नया फैसला लेगा।







