स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
नई दिल्ली: एशियन गेम्स में भारत ने 85 मेडल जरूर जीते, लेकिन इस बार कुछ बड़े नाम उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। अब इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और उन्हें मिल रही सरकारी मदद को लेकर खेल मंत्रालय ने समीक्षा का फैसला किया है। खास तौर पर TOPS के तहत मदद पाने वाले अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर है।
खेल मंत्रालय ने 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक बुलाई है। इसमें एशियन गेम्स के प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों की तैयारी, चोट, फिटनेस और TOPS के तहत होने वाली फंडिंग पर भी चर्चा होगी।
89 अनुभवी खिलाड़ी खाली हाथ लौटे
मंत्रालय के सामने सबसे बड़ा सवाल उन 89 अनुभवी खिलाड़ियों को लेकर है, जो TOPS के समर्थन के बावजूद एशियन गेम्स में कोई मेडल नहीं जीत सके। इनमें से 34 एलीट खिलाड़ियों पर करीब 27.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद एक भी पदक नहीं आना मंत्रालय के लिए चिंता का विषय है। अब यह देखा जाएगा कि इन खिलाड़ियों की तैयारी में कहां कमी रही और जिस स्तर की सुविधाएं उन्हें दी गईं, उसका प्रदर्शन में कितना फायदा मिला।
बैडमिंटन और शूटिंग ने बढ़ाई चिंता
भारत के दो मजबूत खेल इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। बैडमिंटन में भारत को सिर्फ पुरुष टीम का ब्रॉन्ज मिला। पिछली बार गोल्ड जीतने वाली सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी इस बार पहले दौर में ही बाहर हो गई। पीवी सिंधु भी क्वार्टर फाइनल में हार गईं। शूटिंग में भी भारत का प्रदर्शन पिछले एशियन गेम्स के मुकाबले नीचे रहा। भारत ने इस बार 15 मेडल जीते, जबकि हांगझोउ में 22 पदक मिले थे। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर भी इस बार पदक नहीं जीत सकीं।
चोट और फिटनेस मैनेजमेंट भी रडार पर
मंत्रालय खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस को लेकर भी महासंघों से जवाब मांग सकता है। कुछ बड़े खिलाड़ी चोट की परेशानी के बावजूद प्रतियोगिता में पहुंचे, जबकि कुछ खिलाड़ी महत्वपूर्ण मुकाबलों से बाहर रहे। समीक्षा में यह भी देखा जाएगा कि खिलाड़ियों की चोट और उनकी फिटनेस से जुड़ी जानकारी मंत्रालय तक समय पर पहुंची थी या नहीं।
नए खिलाड़ियों ने दिखाया भविष्य
हालांकि कहानी का दूसरा पहलू उम्मीद बढ़ाने वाला है। भारत के 310 खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में डेब्यू किया और इन खिलाड़ियों ने 41 मेडल अपने नाम किए। 17 साल की तीरंदाज कुमकुम महोड़ ने दो गोल्ड और एक सिल्वर जीतकर शानदार शुरुआत की। ट्रैप शूटर नीरू धांडा और गोल्फर प्रणवी उर्स जैसे खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। यही वजह है कि मंत्रालय अब सिर्फ अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि नई प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें समय पर सपोर्ट देने के मॉडल पर भी ध्यान दे सकता है।
TOPS के पैसे का प्रदर्शन से होगा मिलान
TOPS के जरिए सरकार खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, विदेशी एक्सपोजर, उपकरण, कोचिंग और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए आर्थिक मदद देती है। अब मंत्रालय यह देखना चाहता है कि इस निवेश का मैदान पर कितना असर दिखाई दिया। आने वाले समय में खिलाड़ियों की फंडिंग तय करते वक्त उनके मौजूदा प्रदर्शन, भविष्य की संभावनाओं और बड़े टूर्नामेंटों के लक्ष्य को ज्यादा महत्व दिए जाने की संभावना है। भारत ने एशियन गेम्स में 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज सहित कुल 85 मेडल जीते। आंकड़ा पिछली बार के 106 मेडल से कम है, लेकिन नए खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने यह जरूर दिखाया है कि अगली पीढ़ी तैयार हो रही है। अब सबकी नजर 13 अक्टूबर की समीक्षा बैठक पर है। यहीं से संकेत मिल सकता है कि 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए भारत की TOPS फंडिंग और एलीट खिलाड़ियों की तैयारी का मॉडल किस दिशा में जाएगा।







