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गुजरात मॉडल में अस्पताल की ये तस्वीर? 70 साल की महिला खुद खींचती रही स्ट्रेचर

स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।

राजकोट। अस्पताल में मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर मौजूद था, लेकिन उसे खींचने के लिए कोई कर्मचारी नजर नहीं आया। ऐसे में करीब 70 साल की एक बुजुर्ग महिला ने खुद स्ट्रेचर का हैंडल पकड़ा और उसे खींचने लगीं। स्ट्रेचर पर उनके बीमार परिजन थे, जिन्हें इलाज के लिए ले जाना था। गुजरात के राजकोट सिविल अस्पताल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

बुजुर्ग महिला को खुद क्यों खींचना पड़ा स्ट्रेचर?

जिस उम्र में किसी बुजुर्ग को खुद सहारे की जरूरत हो सकती है, उस उम्र में उन्हें अपने बीमार परिजन को स्ट्रेचर पर ले जाने की मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, उस वक्त वहां क्या परिस्थितियां थीं, कर्मचारी मौजूद थे या नहीं और महिला को खुद स्ट्रेचर क्यों खींचना पड़ा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

राजकोट सिविल अस्पताल को सौराष्ट्र के बड़े अस्पतालों में गिना जाता है। यहां लोग इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। खासकर उन परिवारों के लिए, जो महंगे निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, सरकारी अस्पताल बड़ा सहारा होते हैं। ऐसे में वायरल वीडियो अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मदद पर सवाल खड़े करता है।

अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही

वीडियो वायरल होने के बाद राजकोट सिविल अस्पताल के हिसाबी अधिकारी एम.एस. रॉय ने घटना को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, संबंधित एजेंसी को नोटिस भी जारी किया गया है।

दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए SOP बनेगी

अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था का सख्ती से पालन कराया जाएगा, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को इस तरह की परेशानी न हो।

अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

इस मामले में कई सवाल हैं। क्या उस समय स्ट्रेचर ले जाने के लिए कर्मचारी मौजूद नहीं थे? क्या संबंधित एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई? या फिर कोई ऐसी परिस्थिति थी, जिसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है?

इन सवालों के जवाब फिलहाल नहीं मिले हैं। अस्पताल प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है। लेकिन यह घटना एक बुनियादी सवाल जरूर उठाती है- अस्पताल में स्ट्रेचर होना और जरूरत पड़ने पर मरीज को उसे ले जाने के लिए मदद मिलना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। किसी सुविधा का फायदा तभी है, जब जरूरत के समय वह मरीज और उसके परिवार के काम आए।