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गौशाला की जमीनों पर भू-माफियाओं का 'नंगा नाच', किशोर कुमार (सर्राफा) ने उठाई जांच की मांग

लोकल डेस्क, राजीव कु. भारती ।

​सीवान। जिले में गौवंश के संरक्षण और सरकारी गौशालाओं की दुर्दशा अब एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। सीवान के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व किशोर कुमार (सर्राफ) ने इस मामले को लेकर गहरी चिंता जताई है और प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इस पूरे अभियान में उन्हें जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रयाग कुमार का महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्राप्त किया है।

​प्रशासन को अल्टीमेटम: कागजों पर नहीं, जमीन पर हो गौशाला

​किशोर कुमार (सर्राफ) ने कहा कि गौशालाओं की जो जमीन कभी गायों की सेवा के लिए दान की गई थी, आज उस पर भू-माफियाओं और सफेदपोशों ने अवैध कब्जा कर लिया है। उन्होंने अधिवक्ता प्रयाग कुमार के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंपे गए परिवाद में कई कड़वे सवाल पूछे हैं जिसमें करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि आखिर किसकी शह पर भू-माफियाओं के हवाले कर दी गई?जिले में कितनी गौशालाएं निबंधित हैं और उनमें मवेशियों की वास्तविक संख्या क्या है?रखरखाव के नाम पर आने वाले सरकारी फंड और अनुदान का हिसाब सार्वजनिक किया जाए।

​किशोर कुमार का कानूनी रुख: अब सीधे हाईकोर्ट में होगी बात

​इस मामले में कानूनी मोर्चा संभाल रहे किशोर कुमार (सर्राफ) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी एवं पशुपालन  पदाधिकारी सीवान से तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो वे पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आस्था और भ्रष्टाचार से जुड़ा बड़ा आर्थिक अपराध है। अगर प्रशासन ने सुस्ती दिखाई, तो हम जनहित याचिका दाखिल करेंगे ताकि पूरे बिहार की गौशालाओं की जमीन के खरीद-बिक्री घोटाले की जांच हो सके।

किशोर कुमार (सर्राफ) का संकल्प: एक-एक इंच जमीन होगी मुक्त

​किशोर कुमार (सर्राफ) ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गौमाता के नाम पर आवंटित भूमि का गैर-कानूनी इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि​वर्तमान प्रबंध समितियों की सूची सार्वजनिक की जाए।​दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसा जाए, चाहे वे कितने भी रसूखदार क्यों न हों।​गौशालाओं के राजस्व और खर्च का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए। सीवान के इस 'गौशाला बचाओ' अभियान ने अब जोर पकड़ लिया है। किशोर कुमार (सर्राफ) और अधिवक्ता प्रयाग कुमार की यह जुगलबंदी जिले के भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।