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चकाचौंध को ठुकरा, वतन की सेवा, चंपारण DIG हरकिशोर राय की अनसुनी दास्तां

स्टेट डेस्क, एन के सिंह।

सख्त पुलिसिंग के साथ-साथ युवाओं में शिक्षा की अलख जगा रहे DIG राय आज लाखों छात्रों के लिए 'रोल मॉडल' बन चुके हैं।

पूर्वी चंपारण: सफलता अक्सर उन लोगों के कदम चूमती है जिनके इरादे फौलादी होते हैं और जिनके सीने में अपनी मिट्टी के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है। चंपारण रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) हरकिशोर राय एक ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने लाखों के पैकेज वाली सुख-सुविधाओं की जिंदगी को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया ताकि वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिला सकें। हाल ही में रामनगर के राजहंस पब्लिक स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब डीआईजी राय ने अपनी अनछुए जीवन के पहलुओं को साझा किया, तो वहां मौजूद हर छात्र की आंखें गौरव से भर उठीं और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी कहानी केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए उम्मीद की एक किरण है जो संघर्षों के आगे घुटने टेक देते हैं।

मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के निवासी हरकिशोर राय की शुरुआती परवरिश बनारस के बौद्धिक वातावरण में हुई। एक ऐसे परिवार में जहां शिक्षा ही सर्वोपरि थी, उनके तीन भाइयों ने डॉक्टरी (MBBS) को अपना पेशा चुना, लेकिन हरकिशोर की मेधा उन्हें देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर ले गई। वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके पास विदेशों और नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के ढेरों ऑफर थे। उन्होंने लगभग पौने दो साल तक कॉर्पोरेट जगत में एक शानदार और विलासितापूर्ण नौकरी भी की, लेकिन एसी कमरों वाली उस कृत्रिम दुनिया में उनका मन नहीं रमा। उनके भीतर अपनी मिट्टी और अपने प्रदेश के लोगों के लिए कुछ करने की छटपटाहट बनी रही। इसी 'मिट्टी की पुकार' ने उन्हें करोड़ों के भविष्य को छोड़कर वतन वापसी के लिए मजबूर कर दिया।

सफलता का यह मार्ग इतना आसान नहीं था। जमी-जमाई नौकरी छोड़कर दिल्ली की तंग गलियों में UPSC की तैयारी शुरू करना किसी जुए से कम नहीं था। हरकिशोर राय को शुरुआती दो प्रयासों में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों को अपनी ढाल बनाकर उन्होंने तीसरे प्रयास में न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि अपनी इच्छा के अनुसार 'बिहार कैडर' भी हासिल किया। एक अद्भुत संयोग यह भी रहा कि उसी वर्ष उनके बड़े भाई भी IAS बने और दोनों भाइयों को सेवा के लिए अपना गृह प्रदेश बिहार ही मिला। यह उनके समर्पण का ही प्रतिफल था कि आज वे अपराधियों के लिए वज्र और आम जनता के लिए ढाल बनकर उभरे हैं।

आज चंपारण रेंज में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए मशहूर डीआईजी हरकिशोर राय केवल अपराधियों के काल ही नहीं माने जाते, बल्कि वे शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नई अलख जगा रहे हैं। किशनगंज से लेकर भागलपुर, पटना और सीतामढ़ी तक के अपने कार्यकाल में उन्होंने साबित कर दिया है कि एक सच्चा अधिकारी केवल कानून और लाठी से नहीं, बल्कि अपने आचरण और मानवीय संवेदनाओं से लोगों का दिल जीतता है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता; यदि आप अपनी जड़ों से जुड़े हैं और समाज के प्रति ईमानदार हैं, तो पूरी कायनात आपकी सफलता की पटकथा लिखती है।