विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
बर्लिन। जर्मनी में नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर के लिए बनाए गए ऐतिहासिक पहाड़ी विश्रामस्थल ‘ईगल्स नेस्ट’ में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि घटना के पीछे आगजनी का संदेह है और इस मामले में 33 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आग बुझाने के लिए आपातकालीन सेवाओं की टीमें कई घंटों तक जुटी रहीं। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
यह घटना जर्मनी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित बवेरियन आल्प्स के बेर्ख्टेसगाडेन जिले में हुई। अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब 9:15 बजे आपातकालीन सेवाओं को अलार्म के जरिए इमारत में आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकलकर्मी और पुलिसकर्मी घटनास्थल के लिए रवाना हुए। यह ऐतिहासिक इमारत पहाड़ पर बनी एक संकरी सड़क के अंतिम छोर पर स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए कई सुरंगों से होकर गुजरना पड़ता है। बचाव दल जब घटनास्थल की ओर बढ़ रहा था, तभी रास्ते में उन्हें आग की लपटें दिखाई देने लगीं।
घटनास्थल की ओर जाते समय पुलिस और बचावकर्मियों ने एक मोटरसाइकिल सवार को विपरीत दिशा में पहाड़ से नीचे उतरते देखा। उसे रोककर हिरासत में ले लिया गया। अभियोजकों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति 33 वर्षीय जर्मन नागरिक है। उसका संबंध बेर्ख्टेसगाडेन क्षेत्र से है, हालांकि वह फिलहाल वहां नहीं रहता। पूछताछ के दौरान उसमें मानसिक बीमारी के लक्षण दिखाई देने की बात सामने आई, जिसके बाद उसे मनोचिकित्सा केंद्र भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों ने बताया कि ऐतिहासिक इमारत के महत्व को देखते हुए घटना के पीछे किसी राजनीतिक मकसद की संभावना की भी जांच की जाएगी। हालांकि, पुलिस को फिलहाल इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति के शामिल होने के संकेत नहीं मिले हैं।
आग बुझाने के अभियान के दौरान मौसम ने भी मुश्किलें बढ़ा दीं। शुरुआत में बारिश हो रही थी, जो बाद में इस साल की पहली बर्फबारी में बदल गई। इसके साथ चल रही तेज हवाओं ने आग पर काबू पाने के प्रयासों को और कठिन बना दिया। दमकलकर्मियों ने कई घंटों तक आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहीं। आखिरकार रात के दौरान बचावकर्मियों को वहां से हटना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं मिली है। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों और इमारत को हुए नुकसान का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
जर्मन भाषा में ‘केल्श्टाइनहाउस’ के नाम से पहचाना जाने वाला यह विश्रामस्थल समुद्र तल से करीब 1,834 मीटर की ऊंचाई पर एक चट्टान के ऊपर बना है। यहां पहुंचने के लिए पहाड़ी सड़क के अंतिम छोर से चट्टान के भीतर बनी लिफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यह सड़क आम वाहनों के लिए बंद रहती है, लेकिन दिन के समय पर्यटकों को यहां तक लाने और वापस ले जाने के लिए बसें चलाई जाती हैं। वर्ष 1952 से इस इमारत में कैफे और रेस्तरां संचालित हो रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए इसके ऐतिहासिक अतीत से जुड़ी एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
‘ईगल्स नेस्ट’ का निर्माण नाजी शासन के दौर में एडोल्फ हिटलर के लिए पहाड़ी विश्रामस्थल के रूप में किया गया था। हालांकि, ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, हिटलर ने इस इमारत का इस्तेमाल बहुत कम किया था। इसके विपरीत, बेर्ख्टेसगाडेन क्षेत्र में स्थित उसका दूसरा निवास ‘बर्गहोफ’ उसके उपयोग में अधिक रहा। बर्गहोफ नाजी शासन के दौरान हिटलर के प्रमुख निवासों में से एक था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस क्षेत्र के नाजी इतिहास से जुड़ी कई इमारतों और स्थलों में बदलाव किए गए।
बर्गहोफ के खंडहरों को वर्ष 1952 में विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया गया था, जबकि ‘ईगल्स नेस्ट’ को संरक्षित रखा गया और बाद में इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आग से प्रभावित इस ऐतिहासिक इमारत को दोबारा बहाल किया जाएगा। हालांकि, घटना के तुरंत बाद यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम किस तरह किया जाएगा और इसमें कितना समय लग सकता है। फिलहाल पुलिस आगजनी के संदेह में गिरफ्तार व्यक्ति से जुड़े मामले की जांच कर रही है, जबकि इमारत को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।







