नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने जाति आधारित जनगणना को लेकर मोदी सरकार पर फिर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि सरकार जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
2021 के हलफनामे का दिया हवाला
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जाति गणना की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज किया था।
उन्होंने कहा कि हालांकि, हलफनामे के पैरा 12 (डी) में सरकार ने बताया था कि 2011 की जनगणना से पहले जातियों का कोई रजिस्टर तैयार नहीं किया गया था। सरकार ने यह भी कहा था कि जातियों के चयन के लिए ‘ड्रॉप डाउन मेन्यू’, यानी पहले से तैयार जातियों की सूची, बेहतर व्यवस्था होती। इससे एकरूप और भरोसेमंद आंकड़े जुटाए जा सकते थे।
'जब व्यवस्था को आदर्श बताया तो अब सूची क्यों नहीं?'
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने खुद ऐसी व्यवस्था को बेहतर बताया था तो जनगणना-2027 में जातियों की ऐसी सूची क्यों नहीं है।
उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना में जाति सर्वेक्षण से पहले ऐसी सूची तैयार की गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने भी 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इसी तरह की व्यवस्था का सुझाव दिया था।
पीएम मोदी पर पुराने फैसले से भी पीछे हटने का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार जाति गणना की व्यवस्था को विफल करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल 2025 को जाति गणना कराने की घोषणा कर अपने पुराने रुख से यू-टर्न लिया था, लेकिन अब वह अपने उसी फैसले से भी पीछे हट रहे हैं।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘यू-टर्न उस्ताद’ भी करार दिया।







