लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: जिंदगी भी कार की तरह है, समय और स्थिति देखकर गियर बदलने पड़ते हैं। पेट की भूख थोड़े से भोजन से शांत हो सकती है लेकिन मन की भूख पूरी सृष्टि को खाकर भी शांत नहीं हो सकती।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।अगर हमने खुद को समझना और समझाना सीख लिया तो हम संसार पर विजय पा सकते हैं। नकारात्मक विचारों की वरमाला मन को मत पहनाएं,सकारात्मक विचारों की दीपमाला को मन में जलाऐं,निराशा का अँधेरा दूर करें,उमंग का प्रकाश फैलाएं।जब जिंदगी समंदर में गिरती है ना, तब वक्त अपने आप तैरना सीखा देता है।कर्मों का वजन उतना ही इकट्ठा करिए साहब जितना अंत समय में आसानी से उठाकर चल सकते हैं।जो कभी संघर्ष से परिचित नहीं होता, इतिहास गवाह है,वो कभी चर्चित नहीं होता। श्रद्धा ज्ञान देती है, नम्रता मान देती है,योग्यता स्थान देती है, तीनों मिल जाए तो सम्मान देती है।
सुनने को मिलता है कि जो आदमी आपके साथ जैसा व्यवहार करे,उसके साथ वैसा ही करें लेकिन ध्यान रखें,किसी का व्यवहार जैसा उसकी मर्जी हो,हम अपने व्यवहार को खराब क्यों करें ? सामने वाले का बुरा व्यवहार है,वह बदल नहीं पा रहा तो हम उसके कारण अपने आप को क्यों बदल दें। हम तो सज्जनता से बात करेंगे,कांटे अपना स्वभाव नहीं छोड़ते तो फूल अपना स्वभाव कैसे छोड़ दें ? किसी के कहने से यदि अच्छा या बुरा होने लगे,तो ये संसार पूरी तरह से या तो स्वर्ग बन जायेगा या तो नर्क बन जायेगा,इसलिए ये ध्यान मत दीजिए की कौन क्या कहता है,बस वो कीजिए जो अच्छा है। मुस्करा कर चलते रहिए।निंदा ही इस संसार का नियम है,जो आपको भरपूर मिलेगी। प्रशंसा तो ज्यादातर लोग मज़बूरी और स्वार्थ में करते हैं।आप अपने जीवन भाग्य के निर्माता स्वयं है,इसलिए स्वयं अपने विवेक से,शांत चित्त मन से जीवन जीने की पद्धति का अनुसरण करें।जीवन आपका है तो स्वयं निर्धारण करें।







