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जैसलमेर: DRDO गेस्ट हाउस के मैनेजर ISI जासूसी के आरोप में गिरफ्तार

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय |

जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र प्रसाद को ISI के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया

राजस्थान की CID (Security) Intelligence ने जैसलमेर स्थित DRDO गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र प्रसाद को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को संवेदनशील जानकारी लीक की, जिसमें DRDO वैज्ञानिकों और भारतीय सेना अधिकारियों की गतिविधियाँ शामिल थीं, जो मिसाइल और हथियार परीक्षणों से संबंधित थीं।

महेंद्र प्रसाद, जो उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के पल्यूं निवासी हैं, DRDO गेस्ट हाउस में ठेका प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। वह करीब चार से पांच वर्षों से इस पद पर थे, जिससे उन्हें कैंप में आने वाले वैज्ञानिकों, अधिकारियों और परीक्षण कार्यक्रमों की गहन जानकारी तक पहुँच थी।

इस जासूसी कांड की जांच स्वतंत्रता दिवस के मद्देनज़र बढ़ाए गए निगरानी अभियान के दौरान शुरू हुई। जांच में यह सामने आया कि महेंद्र प्रसाद सोशल मीडिया के माध्यम से ISI हैंडलर के संपर्क में थे और उन्होंने DRDO वैज्ञानिकों व भारतीय सेना अधिकारियों की यात्रा, कार्यक्रम और परीक्षण संबंधी विवरण भेजे।

उनके मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में कई संदेहास्पद संवाद और डेटा ट्रांसफर की पुष्टि हुई। फोन में ISI हैंडलर के साथ चल रही बातचीत की प्रविष्टियाँ मिलीं, जो जासूसी की पुष्टि करती हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान CID Intelligence और अन्य खुफिया एजेंसियों ने महेंद्र प्रसाद की केंद्रीय जांच केन्द्र, जयपुर में संयुक्त पूछताछ की व्यवस्था की। इस पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर 12 अगस्त 2025 को उन्हें Official Secrets Act, 1923 के तहत गिरफ्तार किया गया।

अग्रिम सुनवाई के लिए उन्हें बुधवार, 13 अगस्त को न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ उनसे रिमांड और आगे की जांच संबंधी औपचारिकताएँ पूरी की जाएँगी।

सुरक्षा एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस संवेदनशील सूचना लीक की अवधि कितनी लंबी रही, किस हद तक का डेटा साझा किया गया और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को क्या क्षति पहुँची है। सीमा सुरक्षा और खुफिया निगरानी को और सख्त कर दिया गया है, विशेष रूप से स्वतंत्रता दिवस समारोहों से पहले।

यह घटना न केवल भारत की रक्षा प्रणाली में संभावित खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे दुश्मन देश मानवीय संसाधनों का उपयोग कर महत्वपूर्ण सूचनाएँ हासिल करने की कोशिश करते हैं। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और ऐसे मामलों से निपटने के लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।