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झारखंड में सड़क हादसों से छह महीने में 2,478 मौतें, हर दिन औसतन 14 लोगों की जा रही जान

स्टेट डेस्क, रानी कुमारी

रांची, झारखंड में सड़क दुर्घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में राज्य में कुल 3,078 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 2,478 लोगों की मौत हो गई। ये आंकड़े सड़क सुरक्षा की स्थिति और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के कारण कई परिवारों को अपनों को खोना पड़ रहा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच राज्य में हुई सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिदिन औसतन 14 लोगों की जान गई। वहीं, इस अवधि में हर दिन औसतन 17 सड़क दुर्घटनाएं होने का अनुमान है। दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों की संख्या से स्पष्ट है कि सड़क सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों का अलग-अलग आकलन नहीं किया जा सकता।

झारखंड में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है। तेज गति से वाहन चलाना, लापरवाही, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करना तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना सड़क दुर्घटनाओं के सामान्य जोखिम कारक हैं। ऐसे में वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी आवश्यक है।

सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने के लिए समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। दुर्घटनास्थल से घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने, एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करने और अस्पतालों में आपातकालीन उपचार की पर्याप्त व्यवस्था करने से मौतों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सड़क संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और सड़क की स्थिति में सुधार करना भी जरूरी है।

सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भी अहम भूमिका है। वाहन चलाते समय गति सीमा का पालन करना, दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनना, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना और नशे की हालत में वाहन नहीं चलाना दुर्घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है। झारखंड में छह महीने के दौरान सड़क हादसों में हुई 2,478 मौतें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता, सख्त निगरानी और बेहतर आपातकालीन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।