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टीसीएस मामले में बढ़ी सियासत, निदा खान की मदद पर मकोका जांच की मांग

स्टेट डेस्क, प्रीति पायल 

महाराष्ट्र में चर्चित टीसीएस धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में अब राजनीतिक रंग भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य के मंत्री संजय शिरसाट ने आरोप लगाया है कि मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को मदद पहुंचाने वालों की जांच महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति या संगठन ने आरोपी को छिपाने, भागने या जांच से बचाने में सहयोग किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। 

यह बयान उस समय आया जब एआईएमआईएम से जुड़े एक स्थानीय नेता मतीन माजिद पटेल को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस का आरोप है कि निदा खान को फरार रहने के दौरान पनाह दी गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से पुलिस की नजरों से बच रही थी और कई स्थानों पर लगातार ठिकाने बदल रही थी। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने कथित रूप से उसे सहायता पहुंचाई। 

नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय से जुड़े इस मामले में पहले से ही कई एफआईआर दर्ज हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा महिलाओं पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और मानसिक व यौन उत्पीड़न भी किया गया। निदा खान का नाम शुरुआती आरोपियों में शामिल रहा है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी थी। 

पुलिस के मुताबिक, छत्रपति संभाजीनगर से निदा खान को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान उन्हें किस-किस ने सहयोग दिया। जांच एजेंसियां अब कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और संपर्क सूत्रों की जांच कर रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि यदि संगठित तरीके से आरोपी को बचाने की कोशिश की गई है, तो मकोका जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और मामले में शामिल हर व्यक्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार पर मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। 

टीसीएस से जुड़े इस मामले ने राज्य की राजनीति, कॉरपोरेट कार्यस्थलों की सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं। मामले में अब तक कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव मानी जा रही हैं।