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ट्रंप का ऐलान वोटर फ्रॉड का सबूत देने पर मिलेगा 10 लाख डॉलर

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मतदाता धोखाधड़ी के मामलों को लेकर बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि पिछले चुनावों या आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों में मतदाता धोखाधड़ी के ठोस सबूत देने वाले व्यक्ति को 10 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम दिया जाएगा। हालांकि, यह इनाम तभी दिया जाएगा जब सामने आए सबूतों के आधार पर कथित धोखाधड़ी करने वालों को गिरफ्तार किया जाए और अदालत में उन्हें दोषी ठहराया जाए। ट्रंप ने इस घोषणा के साथ चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया।

ट्रंप ने मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर डेमोक्रेटिक पार्टी चुनाव में जीत हासिल करती है, तो अमेरिका को 1929 जैसी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के मुताबिक, चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कथित धोखाधड़ी के मामलों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने गैर-नागरिकों के मतदान से जुड़े मामलों पर भी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उनका प्रशासन ऐसे गैर-नागरिकों को देश से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है, जिन्होंने मतदान किया है। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वह चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, कई राज्यों के चुनाव अधिकारियों का कहना है कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किए जाने के मामले बेहद कम सामने आते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने वाशिंगटन स्टेट में भी संदिग्ध मतदाता पंजीकरण को लेकर कदम उठाया है। प्रशासन ने राज्य से उन करीब 400 लोगों के मतपत्रों को अलग रखने को कहा है, जिन पर अमेरिकी नागरिक नहीं होने के बावजूद मतदान के लिए पंजीकरण कराने का संदेह है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, पिछले चुनावों में इन 400 से अधिक लोगों की ओर से डाले गए करीब 1,500 वोटों की पहचान की गई है। विभाग ने इन मामलों की जांच और मतदाता पात्रता की पुष्टि पर जोर दिया है।

प्रशासन ने वाशिंगटन स्टेट से कहा है कि मध्यावधि चुनाव के दौरान इन लोगों की ओर से डाले जाने वाले मतपत्रों को तब तक अलग रखा जाए, जब तक राज्य के अधिकारी यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि संबंधित व्यक्ति कानूनी रूप से मतदान करने के योग्य हैं या नहीं। इस कदम को लेकर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता पात्रता पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। प्रशासन जहां इसे चुनावी पारदर्शिता और नियमों के पालन से जोड़ रहा है, वहीं उसके आलोचक इसे चुनाव से पहले मतदाताओं पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं।

इस बीच, अमेरिकी संगीतकार नील यंग ने ट्रंप की राजनीतिक एक्शन कमिटी ‘ट्रंप 47 कमिटी इंक.’ के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कमिटी ने उनके गाने ‘राकिन इन द फ्री वर्ल्ड’ का बिना अनुमति इस्तेमाल किया। यंग के मुताबिक, उनके गाने को मध्यावधि चुनाव से जुड़ी रैलियों में उस समय बजाया गया, जब राष्ट्रपति ट्रंप मंच पर पहुंच रहे थे। उन्होंने इस कथित इस्तेमाल को गैर-कानूनी बताते हुए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग की है।

ट्रंप की ओर से मतदाता धोखाधड़ी के सबूत पर 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा, गैर-नागरिकों के मतदान पर कार्रवाई और वाशिंगटन स्टेट में संदिग्ध मतदाताओं के मतपत्रों को अलग रखने का निर्देश ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। वहीं, नील यंग के मुकदमे ने ट्रंप की चुनावी गतिविधियों से जुड़ा एक अलग विवाद खड़ा कर दिया है। इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया, मतदाता पात्रता और राजनीतिक अभियानों को लेकर बहस तेज होती दिखाई दे रही है।