विदेश डेस्क, आर्या कुमारी |
एवियां (फ्रांस) : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने के बाद रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को फिर से लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तेल आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने के बाद अमेरिका इस दिशा में कदम उठाने की स्थिति में होगा।
जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ऊर्जा बाजार से जुड़े हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है। उनका मानना है कि तेल आपूर्ति में सुधार और बाजार के संतुलित होने के बाद रूस के खिलाफ ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने की संभावना बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है। ऐसे में अमेरिका के पास रूस के खिलाफ अपनी प्रतिबंध नीति को फिर से प्रभावी बनाने का अवसर हो सकता है।
ट्रंप के अनुसार, ऊर्जा बाजार की स्थिरता किसी भी नए प्रतिबंधात्मक कदम के लिए महत्वपूर्ण शर्त है। यदि तेल की उपलब्धता और कीमतों में संतुलन बना रहता है तो वाशिंगटन रूस पर ऊर्जा संबंधी दबाव बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिकी प्रशासन ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार की स्थिति को प्राथमिकता दे रहा है। इसी कारण किसी भी प्रतिबंध संबंधी निर्णय को बाजार की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि तेल की आपूर्ति दोबारा सुचारु होने के संकेत मिल रहे हैं और इसी वजह से भविष्य में रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को पुनः लागू करना संभव हो सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय परिस्थितियों के अनुरूप लिया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान रूस के खिलाफ अमेरिकी नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर बना रहता है तो रूस के ऊर्जा निर्यात पर नए प्रतिबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।







