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डीआर कांगो में इबोला से 2,325 मौतें

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को बताया कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर कांगो) में इबोला वायरस के संक्रमण से अब तक 2,325 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही यह देश में अब तक सामने आया इबोला का सबसे घातक प्रकोप बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने सरकारी आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी साझा की है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मौजूदा प्रकोप इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा हुआ है। इस संक्रमण के कारण हुई मौतों का आंकड़ा 2018 से 2020 के बीच डीआर कांगो में फैली पिछली बड़ी इबोला महामारी से भी अधिक हो गया है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस बार मरने वालों की संख्या पिछली महामारी की तुलना में 26 अधिक है।

स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि इबोला का यह प्रकोप डीआर कांगो के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में सामने आया है। संक्रमण के फैलने और बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने के कारण स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने बीमारी पर नियंत्रण पाने और प्रभावित लोगों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने अपने आकलन में शामिल किया है। इन आंकड़ों के आधार पर 2,325 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जो देश में दर्ज किसी भी पिछले इबोला प्रकोप की तुलना में सबसे अधिक है। इससे इस प्रकोप की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

डीआर कांगो में इससे पहले 2018-2020 के दौरान भी इबोला का बड़ा प्रकोप सामने आया था। उस महामारी को भी देश के सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकटों में गिना गया था, लेकिन मौजूदा प्रकोप में उससे 26 अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस तरह मृतकों का आंकड़ा पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है।

डब्ल्यूएचओ लगातार इबोला की स्थिति पर नजर रख रहा है और सरकारी स्वास्थ्य आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन कर रहा है। इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसके प्रकोप में समय पर पहचान, संक्रमित लोगों का उपचार और संक्रमण की रोकथाम बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़े इस प्रकोप में 2,325 मौतों का आंकड़ा सामने आने के बाद डीआर कांगो में इबोला का यह प्रकोप अब तक का सबसे घातक माना जा रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी आंकड़ों ने देश में बीमारी के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण पैदा हुए गंभीर स्वास्थ्य संकट को रेखांकित किया है।