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डॉ. आरके सिन्हा का निधन, पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर बना हजारों लोगों की आजीविका का आधार

नेशनल डेस्क, आकाश अस्थाना ।

 बिहार BJP के वरिष्ठ नेता और उद्योगपति डॉ. आरके सिन्हा का निधन, 75 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा…

पटना/नोएडा। बिहार की राजनीति, पत्रकारिता और उद्योग जगत से शुक्रवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS Group) के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

आरके सिन्हा का जीवन पत्रकारिता, राष्ट्रवादी विचारधारा, संगठनात्मक राजनीति और उद्यमिता के अनूठे संगम के रूप में देखा जाता है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत पत्रकार के रूप में की और बाद में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ देश की प्रमुख निजी सुरक्षा सेवा कंपनियों में शामिल SIS Group की स्थापना कर उद्योग जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

पत्रकारिता से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन का सफर

22 सितंबर 1951 को बिहार में जन्मे आरके सिन्हा की शिक्षा-दीक्षा पटना में हुई। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान और कानून की पढ़ाई की। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया। वे ‘सर्चलाइट’ और ‘प्रदीप’ जैसे समाचार पत्रों से जुड़े रहे।

पत्रकारिता के दौरान उन्होंने राजनीतिक और अपराध जगत की खबरों की रिपोर्टिंग की। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान युद्ध संवाददाता के रूप में भी रिपोर्टिंग की। शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। यही अनुभव आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की मजबूत नींव बना।

1974 में पटना से रखी SIS Group की नींव

आरके सिन्हा की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी के रूप में भी रही। वर्ष 1974 में उन्होंने पटना से Security and Intelligence Services (SIS) की स्थापना की। बेहद छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह उद्यम आगे चलकर भारत के निजी सुरक्षा सेवा उद्योग की प्रमुख कंपनियों में शामिल हो गया।

बताया जाता है कि शुरुआत एक छोटे से किराये के कमरे और सीमित संसाधनों से हुई थी। उस दौर में बांग्लादेश युद्ध के बाद बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक सेवानिवृत्त होकर वापस लौट रहे थे। आरके सिन्हा ने उनकी सैन्य दक्षता और अनुभव को रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम किया। पूर्व सैनिकों को निजी सुरक्षा सेवाओं में अवसर देना उनके कारोबारी मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

समय के साथ SIS Group ने निजी सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा, फैसिलिटी मैनेजमेंट और मानव संसाधन सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार किया। कंपनी ने भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हजारों कर्मचारियों और अनेक कॉर्पोरेट ग्राहकों से जुड़ा यह संस्थान उनके दशकों के उद्यमशील प्रयासों का परिणाम बना। इस तरह पटना से शुरू हुई उनकी कारोबारी यात्रा एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक नेटवर्क तक पहुंची।

जनसंघ से भाजपा तक का राजनीतिक सफर

राजनीतिक रूप से आरके सिन्हा का जुड़ाव भारतीय जनसंघ के दौर से रहा। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित थे और भाजपा के शुरुआती दौर से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्हें बिहार में भाजपा के संस्थापक सदस्यों में गिना जाता है।

उन्होंने पार्टी संगठन के विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों में लंबे समय तक अपनी भूमिका निभाई। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए भेजा। वे 10 अप्रैल 2014 से 9 अप्रैल 2020 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।

राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने संसद में विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। संसद में उनकी उपस्थिति, बहसों और प्रश्नों से संबंधित रिकॉर्ड भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी जुड़े रहे।

शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी योगदान

आरके सिन्हा ने उद्यमिता और राजनीति के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी रुचि दिखाई। उन्होंने देहरादून में द इंडियन पब्लिक स्कूल की स्थापना की। इसके अतिरिक्त अवसार ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंद और मेधावी बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने की पहल भी की।

उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास से जुड़ा रहा। SIS Group के माध्यम से उन्होंने निजी सुरक्षा क्षेत्र में रोजगार के अवसर विकसित किए। यही कारण है कि उनकी पहचान राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ कारोबारी और सामाजिक क्षेत्रों में भी बनी रही।

पटना लाया जाएगा पार्थिव शरीर

डॉ. आरके सिन्हा के निधन की खबर के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कारोबारी जगत से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनके निधन पर दुख जताते हुए पत्रकारिता, समाजसेवा और संगठनात्मक कार्यों में उनके योगदान को स्मरण किया।

परिजनों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर नोएडा से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। अंतिम संस्कार और पार्थिव शरीर के पहुंचने के समय से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर राजनीति और उद्यमिता के बड़े मुकाम तक पहुंच सकता है। जनसंघ और भाजपा के शुरुआती दौर से जुड़ाव, राज्यसभा में प्रतिनिधित्व और पटना से SIS Group जैसी कंपनी खड़ी करने की उनकी यात्रा सार्वजनिक जीवन में उनके बहुआयामी योगदान को दर्शाती है। उनके निधन से बिहार ने राजनीति और उद्योग जगत से जुड़ा एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है, जिसकी पहचान कई क्षेत्रों में रही।