विदेश डेस्क, ऋषि राज |
बेरूत: दक्षिण लेबनान में हुए ताजा इजरायली हवाई हमलों में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिनों पहले अमेरिका की मध्यस्थता में क्षेत्र में तनाव कम करने और युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखने की दिशा में प्रयास तेज किए गए थे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमले दक्षिणी लेबनान के उन इलाकों में किए गए जहां सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की गतिविधियां संचालित होती हैं। हमलों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बचाव दल और चिकित्सा टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं तथा घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई स्थानों पर इमारतों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है।
लेबनान के अधिकारियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। उनका कहना है कि ऐसे हमले पहले से ही संवेदनशील हालात को और अधिक जटिल बना सकते हैं। अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
दूसरी ओर, सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हालिया हमले क्षेत्र में जारी तनाव की नई कड़ी हैं। पिछले कुछ महीनों में इजरायल और लेबनान सीमा पर कई बार संघर्ष और सैन्य गतिविधियां देखने को मिली हैं। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार जारी है, जिससे हालात सामान्य होने की संभावना कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल लेबनान और इजरायल के बीच संबंधों को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर डालती हैं। खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान खोजने पर जोर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाओं ने सभी पक्षों से हिंसा रोकने और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपील की है। उनका मानना है कि निरंतर सैन्य कार्रवाई से आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और मानवीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं।







