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दिल्ली–मोतिहारी रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस ने 16 नाबालिगों को बचाया

नेशनल डेस्क, एन के सिंह।

एसपी के निर्देश पर पताही, पचपकड़ी और ढाका में एक साथ छापेमारी, पुलिस की दबिश से हड़कंप। मानवाधिकार आयोग और एडीजी (कमजोर वर्ग) के विशेष पत्र के बाद एक्शन में जिला पुलिस।

दलदल से रिहाई: 16 मासूम जिंदगियां नर्क से निकाली गईं बाहर, 6 ऑर्केस्ट्रा संचालक सलाखों के पीछे। मुक्ति फाउंडेशन, रेस्क्यू फाउंडेशन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने निभाई अहम भूमिका।

मोतिहारी। पूर्वी चम्पारण की धरती पर मासूमियत के सौदागरों के खिलाफ जिला पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक चोट की है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चलाए गए 'ऑपरेशन नया सवेरा 2.0' ने न केवल 16 नाबालिग बेटियों को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया, बल्कि ऑर्केस्ट्रा की आड़ में चल रहे देह व्यापार और मानव तस्करी के एक घिनौने सिंडिकेट को भी ध्वस्त कर दिया है। रविवार की सुबह जब जिला सोया था, तब खाकी वर्दी के जांबाज 'पाप के सौदागरों' के गढ़ में मौत बनकर दस्तक दे रहे थे।

मिशन 'नया सवेरा': अहले सुबह पुलिस का चक्रव्यूह

इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा बेहद गोपनीय तरीके से लिखी गई थी। एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित जैन और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कड़े निर्देशों के बाद एसपी मोतिहारी ने एक मास्टर प्लान तैयार किया। 5 अप्रैल की सुबह, जब सूरज की पहली किरण भी नहीं फूटी थी, पकड़ीदयाल एसडीपीओ कुमार चंदन और एएचटीयू प्रभारी सर्वेन्द्र कुमार सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीमों ने ढाका, चिरैया, पताही और पचपकड़ी थाना क्षेत्रों को चारों तरफ से घेर लिया।

छापेमारी में खुलासा: संगीत की आड़ में सिसकती मासूमियत

जब पुलिस की टीमें ऑर्केस्ट्रा संचालकों के ठिकानों के भीतर दाखिल हुईं, तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी अधिकारियों की रूह भी कांप गई। चकाचौंध और संगीत की आड़ में इन मासूम बच्चियों से अमानवीय कृत्य कराए जा रहे थे।

पताही: यहाँ से सर्वाधिक 12 नाबालिग लड़कियां बरामद हुईं।
पचपकड़ी: यहाँ से 02 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया।
ढाका: यहाँ से भी 02 किशोरियों को चंगुल से छुड़ाया गया।

हथकड़ियों में 'गुनाह के मास्टरमाइंड'

पुलिस ने मौके से उन 6 दरिंदों को दबोच लिया जो इन बेटियों की मजबूरी का सौदा कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में पचपकड़ी का प्रेम कुमार, पताही के विकेश और नवीन साह, चिरैया का राजू तिवारी, पकड़ीदयाल का राज कुमार और कोलकाता का रहने वाला मनू खान शामिल है। पुलिस इनके मोबाइल और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के अंतरराज्यीय कनेक्शन को खंगाला जा सके।

जांबाज टीम और सामाजिक योद्धाओं का साथ

इस संवेदनशील मिशन की सफलता में दिल्ली के मुक्ति फाउंडेशन (निदेशक विरेन्द्र कुमार सिंह), रेस्क्यू फाउंडेशन और चाइल्ड हेल्पलाइन का तकनीकी और रणनीतिक सहयोग अतुलनीय रहा। वहीं, फील्ड पर ढाका थानाध्यक्ष राजरूप राय, पताही थानाध्यक्ष बबन कुमार, पचपकड़ी थानाध्यक्ष पूजा कुमारी और महिला थानाध्यक्ष मोना कुमारी ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला, जिससे अपराधियों को भागने का मौका तक नहीं मिला।

पुनर्वास की राह: अब सिसकियों की जगह होगी मुस्कान

रेस्क्यू की गई सभी 16 लड़कियों को फिलहाल सुरक्षित कस्टडी में रखकर उनकी काउंसलिंग की जा रही है। जिला पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। 'नया सवेरा 2.0' के तहत अब उन रूटों की पहचान की जा रही है जहाँ से इन लड़कियों को लाया गया था। पुलिस का संकल्प साफ है—मोतिहारी की धरती पर अब बेटियों के बचपन का सौदा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।