नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली। रेड फोर्ट कार ब्लास्ट के आरोपी डॉक्टर्स ने ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स को टारगेट करने की साजिश रची थी। गाजा में इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ मैसेज भेजने के मकसद से यह 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' चार साल से सक्रिय था।
एनआईए जांच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार तीन डॉक्टर्स – मुजम्मिल अहमद गनाई और अदील अहमद राथर (जम्मू-कश्मीर से), शाहीन सईद (उत्तर प्रदेश से) – ने हमलावर उमर-उन-नबी से टारगेट पर मतभेद किया था। वे दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में कॉफी चेन को निशाना बनाना चाहते थे, जिसके संस्थापक यहूदी हैं। कुछ सदस्य सिर्फ जम्मू-कश्मीर में सिक्योरिटी फोर्सेस पर हमले तक सीमित रखना चाहते थे।
ब्लास्ट में 12 से ज्यादा मौतें हुईं, और यह मॉड्यूल अल-कायदा का भारतीय ब्रांच अंसार गजवात-उल-हिंद (एजीयूएच) को पुनर्जीवित करने की कोशिश में लगा था। एजीयूएच के संस्थापक जाकिर मूसा को 2019 में ट्राल में मार गिराया गया था, जबकि आखिरी कमांडर मुजम्मिल अहमद तांट्रे की 2021 में एनकाउंटर में मौत हो चुकी थी। आरोपी 'देश में इस्लामी कानून लागू' करने के एजेंडे पर काम कर रहे थे।
रेड फोर्ट ब्लास्ट: 40 किलो विस्फोटक का धमाका
10 नवंबर 2025 को रेड फोर्ट के पास कार में विस्फोट हुआ, जिसमें उमर-उन-नबी मारा गया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसने जल्दबाजी में 40 किलो विस्फोटक तैयार किया था, क्योंकि ग्रुप के अन्य सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे। विस्फोट से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 दिनों की जांच में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और एजीयूएच से जुड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया।
19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में जेईएम का पर्चा मिला, जिसमें लोकल्स से पुलिस का बहिष्कार करने को कहा गया। इससे शोपियां के एक मौलवी तक पहुंच बनी, और 9-10 नवंबर को फरीदाबाद में दबिशों से 2900 किलो विस्फोटक पदार्थ और हथियार बरामद हुए। जेईएम पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन है।
आरोपियों ने ऑनलाइन वीडियोज से बम बनाने की ट्रेनिंग ली। यूरिया बैग्स सहित हजारों किलो सामग्री बरामद हुई, जो लोकल केमिकल्स से बने बम के लिए थी। इससे कोई रेड फ्लैग नहीं उठा। नबी के फोन से 1.20 मिनट का वीडियो मिला, जिसमें वह 'शहादत ऑपरेशंस' की बात करता नजर आया। पुलवामा के पास डitch में फेंका फोन कई ऐसे वीडियोज से भरा था।
'व्हाइट कॉलर' मॉड्यूल: डॉक्टर्स की साजिश
यह ग्रुप चार साल से एक्टिव था, और डॉक्टर्स की वजह से इसे 'व्हाइट कॉलर' कहा जा रहा। एनआईए ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें ये तीन डॉक्टर्स शामिल हैं। 29 नवंबर 2025 को पाटियाला हाउस कोर्ट में पेशी हुई। स्रोतों का कहना है कि गाजा इश्यू पर मैसेज भेजने के लिए कॉफी चेन को चुना गया, जो इजरायल समर्थक माना जाता है।
जांच में पता चला कि आरोपी एजीयूएच को रिवाइव करना चाहते थे। जेईएम पर्चे से शुरू हुई जांच ने बड़े प्लॉट को उजागर किया। केंद्र ने इसे 'टेररिस्ट इंसिडेंट' करार दिया, और न्याय का वादा किया। ब्लास्ट के तीन हफ्ते बाद सर्वाइवर्स अभी भी जूझ रहे हैं।
संदिग्धों के परिवार सदमे में हैं, अविश्वास से भरे। पुलिस ने नबी के घर के पास से और सबूत बरामद किए। यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास है, जो साजिश की गहराई खंगाल रही है।







