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दिव्यांग सिकमी कुमारी बनी मिसाल... 400 पेंशन में कैसे चलेगा गुजारा सरकार ?

एन. के. सिंह, मोतिहारी |  

ट्रैक्टर चलाकर परिवार पाल रही सिकमी,  पूर्वी चंपारण की इस बेटी को देश का सलाम

पूर्वी चंपारण: जहाँ एक ओर समाज में दिव्यांगों को अक्सर दूसरों पर आश्रित माना जाता है, वहीं पूर्वी चंपारण की चिरैया थाना क्षेत्र के बैद्यनाथ पर गांव निवासी सिकमी कुमारी ने एक मिशाल कायम किया है |  कुल छ: भाई बहन में चार दिव्यांग बहन, पिता दिव्यांग और चाचा जो दोनों पैर से असमर्थ है। ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में पढ़ रही यह दिव्यांग छात्रा न केवल अपनी पढ़ाई जारी रख रही है, बल्कि अपने दिव्यांग माता-पिता, दिव्यांग चार बहनों और पूरे परिवार का भरण-पोषण भी कर रही है। और सबसे चौंकाने वाली बात कि यह सब कुछ ट्रैक्टर चलाकर करती है! जहाँ तक सरकारी मदद का सवाल है? यह मदद उसकी दिव्यांगता के साथ एक मजाक है |

सरकार की सहायता मात्र 400: क्या यह मज़ाक नहीं?
सिकमी कुमारी की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही हृदय विदारक भी। इस बहादुर बेटी को सरकार से सहायता के नाम पर केवल 400 मासिक दिव्यांग पेंशन मिलती है। सोचने वाली बात यह है कि 400 में आज के समय में एक दिन का भी गुजारा मुश्किल है, ऐसे में सीकमी जैसे पूरे परिवार का पालन-पोषण कैसे कर पा रही होगी? यह सवाल सीधे-सीधे सरकारी तंत्र और उसकी कल्याणकारी योजनाओं पर खड़ा करता है।

शिक्षा और संघर्ष का बेजोड़ संगम
सिकमी कुमारी के माता रामपति देवी पिता जोगिंदर साह को अपनी शिक्षित बेटी पर गर्व है, जो शिक्षा के महत्व को समझते हुए भी परिवार की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। जहां अधिकतर युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं सिकमी अपने परिवार के वर्तमान को संवारने के लिए खेतों में कड़ी मेहनत से ट्रैक्टर चलाकर पसीना बहा रही है। उसका यह जज्बा देश की करोड़ों महिलाओं के लिए एक जीती-जागती मिसाल है। यह दिखाता है  कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी शारीरिक बाधा या सामाजिक चुनौती आपको अपने लक्ष्य से डिगा नहीं सकती। बता दें कि  चिरैया थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर गांव निवासी जोगिंदर साह को दो पुत्र और चार दिव्यांग पुत्रियाँ हैं | बड़े पुत्र 28 वर्ष घुटुक साह की शादी होने के बाद अपने माता-पिता का अनादर करते हुए दिव्यांग चार बहन और एक छोटे भाई  को छोड़कर घर परिवार से अलग हो गया, फिर कहानी शुरू हुई सिकमी कुमारी उम्र 22 वर्ष दोनों पैर से दिव्यांग है जो कोटवा के प्राइवेट कॉलेज, राकेश कुवर कॉलेज मैं ग्रेजुएशन की फाइनल ईयर की छात्रा हैं| छोटी बहन गुड़िया कुमारी ग्रेजुएशन में होम साइंस लेकर पढ़ रही है, तीसरी बहन नीरू कुमारी वर्ग आठ, धनवंती कुमारी वर्ग, 8 दिव्यांग है जो गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ रही हैं। वही छोटा भाई राकेश अभी पांचवी क्लास में पढ़ रहा है। सभी भाई-बहन दिव्यांग हैं,जबकि एक सबसे छोटा भाई शरीर से अच्छा है। इसके साथ ही उनके चाचा उपेंद्र साह भी दिव्यांग हैं जो चलने फिरने में पूर्णता असमर्थ है। अपनी शिक्षा के साथ ही सिकमी, परिवार का भरण पोषण ट्रैक्टर चला कर करती हैं।