विदेश डेस्क, ऋषि राज
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊर्जा संसाधनों को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका का दुनिया के लगभग 60 प्रतिशत तेल और गैस संसाधनों पर प्रभावी नियंत्रण है। उन्होंने अपने बयान में वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उसे जोड़ने पर अमेरिका की ऊर्जा क्षमता और मजबूत हो जाती है। ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लास वेगास में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश की तुलना में अधिक तेल और गैस संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि यदि वेनेजुएला के संसाधनों को भी इसमें शामिल किया जाए तो अमेरिका का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच जाता है। ट्रंप ने इसे अमेरिका की रणनीतिक और आर्थिक शक्ति का बड़ा आधार बताया।
उन्होंने अपने संबोधन में वेनेजुएला में चल रही अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार, तीन जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़े अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क लाया गया। उन्होंने कहा कि दोनों पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि मादुरो और फ्लोरेस ने अदालत में इन आरोपों से इनकार किया है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखेगी। उनका कहना था कि ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं तथा अमेरिका अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल ऊर्जा संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक भू-राजनीतिक संदेश भी छिपा है। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है और वहां की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है। ऐसे में अमेरिका की ओर से दिया गया यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों पर असर डाल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार की दिशा पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी। ऊर्जा संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक घटनाक्रम भविष्य में अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।







