एंटरटेनमेंट डेस्क, अर्पिता कृष्णा
रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ में पुराने लोकप्रिय गीतों के इस्तेमाल को लेकर गीतकार समीर अंजान ने नाराजगी जताई है। कोमल नाहटा के यूट्यूब पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स’ में बातचीत के दौरान उन्होंने पुराने गीतों को नए रूप में पेश करने की मौजूदा प्रवृत्ति और उन्हें हिंसक दृश्यों में इस्तेमाल किए जाने पर अपनी आपत्ति जाहिर की।
समीर ने कहा कि पुराने गीतों को दोबारा प्रस्तुत करने में उन्हें अपने आप में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने अपने गीत ‘दिलबर’ के नए रूप का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे उनका पुराना गीत नई पीढ़ी तक पहुंचा। हालांकि, उनके मुताबिक समस्या तब होती है, जब किसी पुराने गीत को दोबारा बनाते समय मूल गीतकार की अनदेखी की जाती है और गीत की मूल भावना से अलग सामग्री जोड़ दी जाती है।
उन्होंने ‘धुरंधर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म में पुराने गीतों को हिंसा और गोलीबारी वाले दृश्यों की पृष्ठभूमि में इस्तेमाल किया गया। इसी संदर्भ में उन्होंने फिल्म को लेकर “सत्यानाश कर दिया” जैसी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि ऐसे इस्तेमाल से पुराने गीत की भावना और संदर्भ प्रभावित होते हैं।
समीर ने ‘हम प्यार करने वाले’ का भी जिक्र किया, जिसे ‘धुरंधर’ में नए रूप में पेश किया गया है। हालांकि, उन्होंने इस गीत के नए संस्करण को लेकर हमेशा नकारात्मक रुख नहीं अपनाया है। अप्रैल 2026 में एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि ‘धुरंधर’ के जरिए उनका यह गीत नई पीढ़ी तक पहुंचा make और उन्होंने पुराने गीतों के अच्छे पुनर्निर्माण को सकारात्मक बताया था।
गीतकार ने यह भी कहा कि रचनात्मक कृतियों के पुनर्निर्माण में मूल रचनाकारों के योगदान और गीत की मूल भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्र के आधार पर अनुभवी गीतकारों को पुराने विचारों वाला मानने की धारणा पर भी असहमति जताई।
समीर ने फिल्म के एक्शन दृश्यों के संदर्भ में ‘जुम्मा चुम्मा’ के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में पुराने गीतों को हिंसक दृश्यों के साथ जोड़ना उन्हें उचित नहीं लगता। यह उनकी व्यक्तिगत रचनात्मक आलोचना है, इसे फिल्म निर्माताओं के खिलाफ किसी कानूनी आरोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
समीर अंजान की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब पुराने लोकप्रिय गीतों को नए संगीत संयोजन के साथ फिल्मों में शामिल करने का चलन बढ़ा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरी तरह गलत नहीं बताया, बल्कि मूल रचना, उसके रचनाकार और उसकी भावना के सम्मान को जरूरी बताया है।







