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नई अंगड़ाई के साथ दुनिया पर छाने को तैयार है भारत: दत्तात्रेय

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय |

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का दरभंगा में उद्बोधन: भारत के बढ़ते वैश्विक कद के बारे में की बात 

दरभंगा, बिहार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दरभंगा में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के बढ़ते वैश्विक कद और राष्ट्र निर्माण में इस क्षेत्र के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक योगदान पर एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। इस अवसर पर उन्होंने "राज दरभंगा - धर्म संरक्षण से लोक कल्याण तक" नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो दरभंगा के शाही परिवार के इतिहास और विरासत पर आधारित है।

अपने उद्बोधन में, होसबाले ने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विदेशी इतिहासकारों द्वारा दिए गए उस आख्यान को चुनौती दी जिसमें भारतीय राजाओं को भोग-विलासी और व्यक्तिगत सुखों पर केंद्रित बताया गया है। इसके बजाय, उन्होंने भारतीय शासकों के अपने लोगों के कल्याण के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान राम, राजा दशरथ, राजा हरिश्चंद्र और राजा भागीरथ जैसे शासकों का उदाहरण दिया, जिन्हें अपनी प्रजा की भलाई के लिए उनके समर्पण के लिए सम्मानित किया जाता था।

होसबाले ने दरभंगा के शाही परिवार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और परोपकारी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने हिंदू धर्म और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दरभंगा के राजा ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए देशभर में सम्मेलनों का आयोजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विश्व हिंदू परिषद की स्थापना में भी सहायता की।

सरकार्यवाह ने आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में दरभंगा राज परिवार की भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान शामिल है। उन्होंने कहा कि दरभंगा राज परिवार ने न केवल धर्म के संरक्षण के लिए काम किया, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज के उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

होसबाले का यह भाषण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उसके बढ़ते वैश्विक प्रभाव के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में दरभंगा के शाही परिवार के योगदान पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और समृद्ध विरासत के प्रति जागरूक करना था।

यह कार्यक्रम दरभंगा के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने न केवल इस क्षेत्र के इतिहास को उजागर किया, बल्कि भारत के भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। होसबाले ने अपने भाषण के माध्यम से यह संदेश दिया कि राष्ट्र का विकास केवल आर्थिक प्रगति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों को समझने और उनका सम्मान करने पर भी निर्भर करता है। इस प्रकार, दरभंगा राज परिवार का इतिहास हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति और नेतृत्व अपने लोगों के प्रति निस्वार्थ सेवा और समर्पण में निहित है।