नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
- 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग, शुभ रंग और इस दिन का धार्मिक महत्व
नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन उनकी आराधना कर जीवन में सुख-शांति, आत्मबल और सफलता की कामना करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। इस दिन सफेद रंग का विशेष महत्व माना जाता है। मां को चीनी और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा भी है।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, वह देवी पार्वती का तपस्विनी रूप हैं। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपना संकल्प नहीं छोड़ा। उनकी इसी साधना, धैर्य और समर्पण को मां ब्रह्मचारिणी के रूप में याद किया जाता है।
‘ब्रह्मचारिणी’ नाम का संबंध तप और अनुशासित जीवन से है। मां का यह स्वरूप भक्तों को सिखाता है कि किसी लक्ष्य को पाने के लिए धैर्य, संयम और लगातार प्रयास करना जरूरी है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप क्या संदेश देता है?
धार्मिक चित्रों में मां ब्रह्मचारिणी को सफेद वस्त्र पहने हुए दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है।
जपमाला ध्यान, साधना और ईश्वर के प्रति भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। वहीं कमंडल सादगी और संयम से जुड़े जीवन का संदेश देता है।
मां का शांत स्वरूप यह बताता है कि मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना और अपने लक्ष्य पर ध्यान देना कितना जरूरी है। नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त इसी भावना के साथ उनकी पूजा करते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन घर पर भी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा सकती है। पूजा के लिए सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
इसके बाद मां दुर्गा के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। मां को फूल, अक्षत, चंदन और अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री अर्पित करें। यदि पहले दिन घटस्थापना की गई है, तो परिवार की परंपरा के अनुसार कलश की पूजा भी जारी रखें।
इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करें। अंत में आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
पूजा के लिए किसी बहुत बड़ी व्यवस्था की जरूरत नहीं है। घर की परंपरा और श्रद्धा के अनुसार साधारण तरीके से भी मां की आराधना की जा सकती है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
इस मंत्र के जरिए भक्त मां ब्रह्मचारिणी को नमन करते हैं और उनसे धैर्य, आत्मबल, ज्ञान तथा साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मांगते हैं।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप की संख्या हर व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और सुविधा के अनुसार अलग हो सकती है।
मां ब्रह्मचारिणी के ध्यान के लिए यह पारंपरिक श्लोक भी पढ़ा जाता है:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इस श्लोक में जपमाला और कमंडल धारण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी से कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
मां को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है। कुछ घरों में फल, पंचामृत और अन्य सात्विक चीजें भी अर्पित की जाती हैं।
भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य लोगों में बांटा जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री चुन सकते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मां को श्रद्धा से भोग अर्पित करने और उनकी पूजा करने से मन में सकारात्मकता आती है। हालांकि, पूजा में किसी खास सामग्री का इस्तेमाल सभी जगह अनिवार्य नहीं माना जाता।
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग क्यों खास है?
12 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए सफेद रंग प्रचलित रंग परंपरा से जुड़ा है। सफेद रंग को शांति, सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी के सफेद वस्त्रों वाले स्वरूप के कारण भी इस रंग का विशेष महत्व बताया जाता है।
इस दिन कई भक्त सफेद कपड़े पहनकर पूजा करते हैं। हालांकि, नवरात्रि के रंगों की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार बदल सकती है। मां की पूजा के लिए सफेद कपड़े पहनना अनिवार्य नहीं है।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा से मिलती है धैर्य की सीख
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी साधना आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा इसी दृढ़ निश्चय और समर्पण की याद दिलाती है। इसका संदेश है कि जीवन में हर सफलता तुरंत नहीं मिलती। कई बार लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है।
विद्यार्थियों, कामकाजी लोगों और जीवन में किसी चुनौती का सामना कर रहे लोगों के लिए भी यह संदेश प्रेरणादायक माना जाता है। धैर्य के साथ प्रयास जारी रखना और कठिन समय में अपने उद्देश्य पर ध्यान देना इस स्वरूप की पूजा से जुड़ी प्रमुख सीख है।







