स्टेट डेस्क, एन. के. सिंह।
नशामुक्त बिहार का संकल्प: जब खाकी ने उठाई समाज सुधार की मशाल। डीजीपी विनय कुमार का आह्वान 'सिर्फ गिरफ्तारी समाधान नहीं, नशे के खिलाफ युद्ध में समाज को बनना होगा सारथी'।
पटना: बिहार की धरती पर अब केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि एक ऐसी सामाजिक बुराई के खिलाफ शंखनाद हुआ है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को दीमक की तरह चाट रही है। सोमवार को पटना स्थित पुलिस मुख्यालय के सभागार में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। अवसर था मद्यनिषेध को लेकर आयोजित कार्यशाला का, लेकिन माहौल एक बड़े समाज सुधार के अभियान जैसा था। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने यहाँ से "नशामुक्त बिहार" का जो रोडमैप पेश किया, उसमें पुलिस की सख्ती के साथ-साथ एक अभिभावक की संवेदनशीलता भी दिखी।
कहानी एक विखंडित भविष्य को बचाने की
डीजीपी विनय कुमार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक हँसते-खेलते परिवार की बर्बादी की पटकथा है। उन्होंने बड़े ही भावुक शब्दों में कहा, "नशा आज हमारे युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। एक बार इसकी लत लग गई तो वापसी का रास्ता कठिन हो जाता है।" उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद हर पुलिस अधिकारी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनकी भूमिका केवल अपराधी को जेल भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक टूटते हुए परिवार को बचाने की भी है।
रणनीति: 'सुरक्षा कवच' और तकनीक का संगम
इस जंग को जीतने के लिए डीजीपी ने 'इच्छाशक्ति' और 'बेहतर समन्वय' का मंत्र दिया। अब बिहार पुलिस अकेले नहीं, बल्कि NCB, STF और उत्पाद विभाग के साथ मिलकर एक अभेद्य "सुरक्षा कवच" तैयार करेगी।
कार्यशाला के मुख्य स्तंभ:
- कानूनी प्रहार: NDPS अधिनियम की बारीकियों को समझना ताकि अपराधी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर बच न सकें।
- वैज्ञानिक जांच: मादक पदार्थों की सैंपलिंग और प्रमाणीकरण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
- मानवीय चेहरा: अपराधियों पर सख्ती, लेकिन आम जनता और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता।
हमारा लक्ष्य केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि एक ऐसा वातावरण बनाना है जहां हमारी आने वाली पीढ़ी नशे के अंधेरे से दूर रहे। जागरूक समाज और प्रशिक्षित पुलिस ही इस लक्ष्य को हासिल कर सकती है: विनय कुमार, डीजीपी, बिहार
अधिकारियों को मिला 'विजय मंत्र'
इस आयोजन में मद्यनिषेध सचिव अजय यादव और एडीजी कुंदन कृष्ण समेत कई दिग्गज अधिकारियों ने शिरकत की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे फील्ड में केवल कार्रवाई न करें, बल्कि दस्तावेजीकरण (Documentation) को इतना पुख्ता बनाएं कि नशे के सौदागरों को कानून के शिकंजे से निकलना नामुमकिन हो जाए।
एक नई शुरुआत
डीजीपी की यह पहल बिहार में पुलिसिंग के एक नए युग की शुरुआत है। जहाँ पुलिस अब समाज सुधारक की भूमिका में भी नज़र आएगी। अगर समाज पुलिस के इस 'विजय मंत्र' के साथ जुड़ता है, तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार का हर युवा नशे के अंधेरे को पीछे छोड़ सफलता के उजाले की ओर बढ़ेगा।







