Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर भड़के अशोक पंडित, मनोचिकित्सक से सलाह लेने को कहाS

राष्ट्रीय डेस्क, शुभम कुमार तिवारी

फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की भाषा और सार्वजनिक व्यवहार पर सवाल उठाए। शाह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के समर्थन में वीडियो जारी करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की थी।

मुंबई, 29 अक्टूबर। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके बयान की आलोचना की है। ANI से बातचीत में पंडित ने कहा कि शाह को मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने अभिनेता पर बार-बार सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर करने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पंडित का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से शाह की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो रही है। हालांकि, मनोवैज्ञानिक स्थिति से संबंधित उनकी टिप्पणियां व्यक्तिगत राय और आरोप हैं, किसी चिकित्सकीय मूल्यांकन का परिणाम नहीं।

अशोक पंडित ने बातचीत के दौरान कहा कि वह शाह की कथित अभद्र भाषा और व्यवहार से हैरान नहीं हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ महीनों से अभिनेता लगातार विवादित टिप्पणियां कर रहे हैं और सार्वजनिक मंचों पर अपनी नाराजगी जाहिर करते दिखाई देते हैं। पंडित ने आरोप लगाया कि कैमरे के सामने शाह का व्यवहार उनकी निराशा और असुरक्षा को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता की ऐसी प्रतिक्रियाएं लगातार सार्वजनिक चर्चा का विषय बन रही हैं।

फिल्म निर्माता ने शाह के अभिनय और हाल के बयानों के बीच संबंध जोड़ते हुए दावा किया कि अभिनेता कुछ फिल्मों की विषयवस्तु से असहज महसूस कर सकते हैं। उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन फिल्मों की कथाएं शाह के वैचारिक दृष्टिकोण के अनुकूल नहीं हैं। पंडित ने आरोप लगाया कि इस तरह की असहमति के कारण अभिनेता अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं। हालांकि, शाह की भावनाओं या उनके व्यवहार के पीछे के कारणों को लेकर पंडित के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यह विवाद नसीरुद्दीन शाह की उस वीडियो टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसे उन्होंने मंगलवार को फेसबुक पर साझा किया था। वीडियो में शाह ने दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उन छात्रों का समर्थन किया, जो अपने छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वीडियो में अभिनेता केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना करते नजर आए। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ लिखे बैज के साथ अपनी बात रखी और कहा कि वह गर्व से स्वयं को ‘दिमागी नक्सल’ घोषित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रविरोधी जैसे शब्दों और अन्य उपनामों के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है।

शाह की टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। अशोक पंडित ने उनके शब्दों और सार्वजनिक आचरण पर आपत्ति जताई, जबकि शाह ने अपने वीडियो में छात्र आंदोलन और राजनीतिक असहमति के मुद्दे उठाए। यह विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक आलोचना और सार्वजनिक व्यक्तियों की भाषा को लेकर बहस का हिस्सा बन गया है।

नसीरुद्दीन शाह पिछले कुछ महीनों में छात्र आंदोलनों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (SRFTI) में छात्र विरोध प्रदर्शन के समर्थन में भी टिप्पणी की थी। उनके बयानों को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

फिलहाल, अशोक पंडित की टिप्पणी और नसीरुद्दीन शाह के वीडियो ने एक बार फिर दोनों के बीच वैचारिक मतभेदों को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। मामले का केंद्र शाह की राजनीतिक टिप्पणी, पंडित की प्रतिक्रिया और सार्वजनिक बहस में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा बनी हुई है।