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नेपाल में पहली बार महिला अंतरिम PM: सुशीला कार्की लेंगी शपथ, छह महीने में होंगे चुनाव

विदेश डेस्क, वेरोनिका राय |

नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक पल आने वाला है। नेपाल की पूर्व चीफ़ जस्टिस सुशीला कार्की को देश की नई अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। संसद को भंग करने के बाद राष्ट्रपति ने उनके नाम पर मुहर लगाई। सुशीला कार्की आज शाम को शपथ लेंगी। यह पहली बार होगा जब नेपाल के इतिहास में कोई महिला प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेगी।

सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने का फैसला राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और जन-आंदोलन के नेताओं के बीच सहमति बनने के बाद लिया गया। जेन-जी आंदोलनकारियों ने लंबे समय से यह मांग की थी कि देश को नया नेतृत्व चाहिए और पुरानी राजनीतिक जमातों को हटाकर तटस्थ और ईमानदार नेतृत्व को मौका दिया जाए। सुशीला कार्की का नाम सामने आने के बाद विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे शांत होने लगे।

बताया जा रहा है कि नई अंतरिम सरकार का मुख्य उद्देश्य अगले छह महीने से एक साल के भीतर चुनाव कराना और देश को स्थिरता की ओर ले जाना होगा। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नेपाल के राजनीतिक संकट को खत्म करने की दिशा में बड़ा निर्णय है। संसद को भंग करने और नई सरकार बनाने पर पूरे दिन गहन चर्चा और विचार-विमर्श हुआ था। राष्ट्रपति ने विभिन्न राजनीतिक दलों और संवैधानिक जानकारों से मुलाकात की और अंततः संसद भंग करने का निर्णय लिया।

इससे पहले अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा हुई थी। काठमांडू के युवा मेयर और पूर्व रैपर बालेंद्र शाह का नाम सबसे पहले चर्चा में था। उन्होंने हाल के वर्षों में युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की है। इसके अलावा नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख कुलमान घीसिंग का नाम भी दौड़ में था। हालांकि, सभी पक्ष सुशीला कार्की के नाम पर सहमत हो गए।

सुशीला कार्की का मानना था कि देश को स्थिर करने के लिए सबसे पहले संसद को भंग कर अंतरिम सरकार बनाई जानी चाहिए, ताकि नए चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में कराए जा सकें। कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ़ जस्टिस रह चुकी हैं और उन्हें एक सख़्त और निष्पक्ष न्यायधीश के रूप में जाना जाता है। उनके नेतृत्व में न्यायपालिका ने कई अहम फैसले दिए थे।

इस राजनीतिक हलचल के बीच अब नेपाल में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। कई शहरों में कर्फ्यू में ढील दी जा रही है। पहले जहां पूरे दिन कर्फ्यू लागू था, वहीं अब कई जगह केवल शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू रहेगा। स्थानीय प्रशासन हालात का आकलन कर धीरे-धीरे और रियायतें देने पर विचार कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेपाल के लिए नई शुरुआत का संकेत है। अगर अंतरिम सरकार सफलतापूर्वक चुनाव करवा पाती है तो यह लोकतंत्र को और मज़बूत करेगी और जनता के भरोसे को फिर से कायम करेगी।