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पटना HC की नई मुख्य न्यायाधीश बनेंगी मीनाक्षी मदन राय

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय ।

पटना: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने सिक्किम उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय को पटना उच्च न्यायालय का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में 22 मई 2026 को आयोजित कॉलेजियम की उच्च स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। यह नियुक्ति पटना उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की आगामी 4 जून 2026 को होने वाली सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद प्रभावी हो जाएगी। इस अनुशंसा के साथ ही बिहार के न्यायिक हलकों और देश की उच्च न्यायपालिका में हर्ष का माहौल है।

न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का यह चयन न केवल उनके उत्कृष्ट न्यायिक करियर का सम्मान है, बल्कि पटना उच्च न्यायालय के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। पटना हाईकोर्ट, जो देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संवैधानिक न्यायालयों में से एक है, के इतिहास में बहुत कम अवसरों पर महिलाओं को शीर्ष न्यायिक नेतृत्व का अवसर मिला है। इससे पहले वर्ष 2010 से 2014 के दौरान न्यायमूर्ति रेखा मनहरलाल दोशित ने पटना हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। लगभग एक दशक से अधिक समय के बाद अब जस्टिस मीनाक्षी मदन राय इस शीर्ष पद को सुशोभित करने जा रही हैं। उनकी यह संभावित नियुक्ति बिहार के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे में महिला सशक्तिकरण और समावेशन की एक नई लहर लेकर आएगी।

न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का जीवन और उनका न्यायिक सफर अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। 12 जुलाई 1964 को सिक्किम के एक सम्मानित परिवार में जन्मी जस्टिस राय के पिता मदन मोहन रसैली सिक्किम सरकार के पूर्व गृह सचिव रह चुके हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गंगटोक और कुर्सियांग से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सुप्रसिद्ध लेडी श्री राम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की। कानून के प्रति अपनी गहरी रुचि के कारण उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से 1989 में LLB की डिग्री हासिल की और 1990 में दिल्ली बार एसोसिएशन के साथ एक अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुईं। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में दिल्ली उच्च न्यायालय और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकालत की।

दिसंबर 1990 में उन्होंने सिक्किम न्यायिक सेवा में शामिल होकर एक नया इतिहास रचा, जब वे सिक्किम की पहली महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) बनीं। इसके बाद उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों जैसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश और सिक्किम हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल के रूप में अपनी अद्वितीय सेवाएं दीं। 15 अप्रैल 2015 को उन्हें सिक्किम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया, जिससे वे सिक्किम से उच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने कई अवसरों पर सिक्किम हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का पदभार भी बेहद कुशलता से संभाला। न्यायिक कार्यों के साथ-साथ वे विधिक सहायता, घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद और बालिकाओं के अधिकारों के लिए भी लगातार सक्रिय रही हैं। उनकी नियुक्ति से भारतीय उच्च न्यायालयों में एक साथ 4 महिला मुख्य न्यायाधीशों के कार्यरत होने का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित होने जा रहा है।